नई दिल्ली. इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष सैम पित्रोदा एक बार फिर अपने बयानों के कारण विवादों के केंद्र में हैं। इस बार मुद्दा राजनीतिक नहीं, बल्कि तकनीकी है। पित्रोदा ने भारत के पास अपना ‘मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम’ (OS) न होने को “शर्म की बात” बताया, जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उन पर देश की उपलब्धियों को कमतर आंकने और झूठ फैलाने का आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला है।
पित्रोदा का दावा: “प्रतिभा है, पर उत्पाद नहीं”
एक हालिया इंटरव्यू में सैम पित्रोदा ने भारतीय तकनीकी परिदृश्य पर निराशा व्यक्त की। उनके बयान के मुख्य बिंदु निम्नलिखित थे:
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ग्लोबल ब्रांड की कमी: पित्रोदा ने सवाल उठाया कि 1.5 अरब की आबादी और बेहतरीन इंजीनियरों के बावजूद भारत माइक्रोसॉफ्ट, गूगल या फेसबुक जैसा कोई वैश्विक प्लेटफॉर्म क्यों नहीं बना पाया।
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ब्रेन ड्रेन: उन्होंने कहा कि भारतीय प्रतिभाएं देश के विकास के बजाय बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) को समृद्ध कर रही हैं।
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OS पर तंज: उन्होंने विशेष रूप से मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम का जिक्र करते हुए इसे राष्ट्रीय विफलता करार दिया।
भाजपा का पलटवार: “भ्रम फैला रही है कांग्रेस”
पित्रोदा के इस बयान पर भाजपा ने तुरंत मोर्चा संभाला। पार्टी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इसे भारत की छवि खराब करने की सोची-समझी कोशिश बताया। उन्होंने तथ्यों के साथ पित्रोदा के दावों को खारिज करते हुए कुछ प्रमुख भारतीय ऑपरेटिंग सिस्टम्स की सूची पेश की:
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BharOS: IIT मद्रास द्वारा विकसित स्वदेशी मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम।
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Maya OS: रक्षा मंत्रालय के कंप्यूटरों के लिए बनाया गया सुरक्षित साइबर सिस्टम।
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Indus OS: भारतीय भाषाओं पर केंद्रित एक लोकप्रिय प्लेटफॉर्म।
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BOSS (Bharat Operating System Solutions): लिनक्स आधारित भारतीय वितरण।
भाजपा का तर्क है कि भारत ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान के तहत न केवल सॉफ्टवेयर बल्कि सेमीकंडक्टर और हार्डवेयर निर्माण में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।
क्या है जमीनी हकीकत?
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से इतर, विशेषज्ञों का मानना है कि यह बहस दो अलग पहलुओं पर आधारित है:
| पहलू | स्थिति |
| तकनीकी क्षमता | भारत के पास BharOS और Maya OS जैसे सफल प्रोटोटाइप और फंक्शनल सिस्टम मौजूद हैं। (भाजपा का पक्ष सही है) |
| बाजार हिस्सेदारी | वैश्विक स्तर पर Android और iOS का एकाधिकार है। भारतीय OS अभी आम नागरिकों के बीच ‘Mass Adoption’ के स्तर पर नहीं पहुंचे हैं। (पित्रोदा का इशारा इसी ओर है) |
पित्रोदा का बयान जहाँ भारत की ‘प्रोडक्ट नेशन’ बनने की धीमी गति पर सवाल उठाता है, वहीं भाजपा का जवाब यह स्पष्ट करता है कि देश अब केवल ‘सर्विस प्रोवाइडर’ नहीं रहा, बल्कि अपनी सुरक्षा और जरूरतों के लिए स्वदेशी समाधान विकसित कर चुका है। फिलहाल, इस जुबानी जंग ने देश में “स्वदेशी तकनीक बनाम वैश्विक प्रतिस्पर्धा” की बहस को नई दिशा दे दी है।
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