नई दिल्ली । शनिवार, 25 अप्रैल 2026
कहते हैं कि “न्याय मिलने में देरी हो सकती है, लेकिन अंधेर नहीं।” दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने इस कहावत को चरितार्थ कर दिखाया है। तीन दशकों तक पुलिस और कानून को चकमा देने वाला अपराधी सलीम वास्तिक अब सलाखों के पीछे है। यह मामला केवल एक अपराधी की गिरफ्तारी का नहीं है, बल्कि उस 13 साल के मासूम संदीप बंसल को मिला न्याय है, जिसकी चीखें 1995 में फिरौती न मिलने पर खामोश कर दी गई थीं।
क्या था 1995 का वह सनसनीखेज मामला?
साल 1995 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली के एक प्रतिष्ठित कारोबारी के घर में मातम पसर गया था। उनके 13 वर्षीय बेटे संदीप बंसल का अपहरण कर लिया गया। अपहरणकर्ताओं, जिनमें सलीम वास्तिक मुख्य भूमिका में था, ने भारी फिरौती की मांग की। जब परिवार मांग पूरी करने में असमर्थ रहा, तो आरोपियों ने बेरहमी से मासूम संदीप की हत्या कर दी। इस घटना ने उस दौर में पूरी दिल्ली को हिला कर रख दिया था।
सजा, जमानत और ‘मौत’ का फर्जी खेल
कानूनी प्रक्रिया के बाद 1997 में अदालत ने सलीम वास्तिक को दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। लेकिन कहानी में मोड़ तब आया जब साल 2000 में उसे पैरोल या जमानत मिली। बाहर आते ही सलीम ने गायब होने की ऐसी पटकथा लिखी कि पुलिस भी हैरान रह गई।
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खुद को घोषित किया मृत: गिरफ्तारी से बचने के लिए सलीम ने फर्जी दस्तावेजों या अफवाहों के जरिए खुद को मृत घोषित करवा दिया था।
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पहचान का बदलाव: वह लगातार अपने ठिकाने बदलता रहा और एक सामान्य नागरिक की तरह छिपकर रहने लगा।
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हाई कोर्ट की सख्ती: 2011 में दिल्ली हाई कोर्ट ने उसकी अपील को खारिज कर दिया था, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिल पा रहा था।
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क्राइम ब्रांच का ‘ऑपरेशन क्लीन स्विप’
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने इस ‘कोल्ड केस’ को दोबारा खोला। जांच टीम ने तकनीकी सर्विलांस के साथ-साथ पारंपरिक जासूसी का सहारा लिया।
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पुराने दस्तावेजों का विश्लेषण: पुलिस ने 90 के दशक के फिंगरप्रिंट्स और पुरानी तस्वीरों को डिजिटल रूप में बदला।
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लोनी में मिला सुराग: खुफिया सूचनाओं के आधार पर पता चला कि सलीम उत्तर प्रदेश के लोनी (गाजियाबाद) इलाके में अपनी पहचान बदलकर रह रहा है।
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सटीक कार्रवाई: बिना किसी देरी के, पुलिस ने जाल बिछाया और उस व्यक्ति को धर दबोचा जो खुद को मरा हुआ बता रहा था। फिंगरप्रिंट मिलान ने पुष्टि कर दी कि यही सलीम वास्तिक है।
नवीनतम अपडेट (Corrections & Updates)
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भ्रम: कुछ शुरुआती रिपोर्टों में इसे केवल 24 साल की फरारी बताया गया था, लेकिन रिकॉर्ड के अनुसार वह 2000 से फरार था, जिससे कुल 26 साल की सक्रिय फरारी और अपराध के समय से 31 साल का अंतराल बनता है।
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वर्तमान स्थिति: सलीम को ट्रांजिट रिमांड या सीधे अदालत में पेश कर जेल भेज दिया गया है। उसकी जमानत में मदद करने वाले या उसे शरण देने वालों की भी जांच की जा सकती है।
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