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केरल: मुनंबम भूमि विवाद पर सीएम वी. डी. सतीशन का बड़ा आश्वासन, कहा- ‘किसी को बेदखल नहीं होने देंगे’

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तिरुवनंतपुरम सोमवार, 25 मई 2026

केरल में नव-निर्वाचित संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF) सरकार के सत्ता संभालते ही एर्नाकुलम जिले का तटीय क्षेत्र ‘मुनंबम’ एक बार फिर भीषण राजनीतिक और सामाजिक गरमाहट का केंद्र बन गया है। केरल के मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन ने सोमवार को एक संवाददाता सम्मेलन में मुनंबम भूमि विवाद से प्रभावित लगभग 600 से अधिक परिवारों (जिनमें अधिकांश ईसाई समुदाय से हैं) को दृढ़ता से आश्वस्त किया है कि उन्हें उनके घरों और जमीनों से किसी भी कीमत पर बेदखल नहीं किया जाएगा।

मुख्यमंत्री सतीशन ने स्पष्ट शब्दों में कहा:

“हमने यह अंतिम निर्णय लिया है कि इन पीड़ितों को उनकी जगहों से बेदखल नहीं किया जाएगा। उनकी पूरी रक्षा की जाएगी और उन्हें उनकी भूमि का कानूनी अधिकार मिलेगा। हमारी सरकार इसके लिए आखिरी सांस तक कानूनी लड़ाई लड़ेगी।”

वक्फ बोर्ड के कदम पर तीखा हमला और ’10 मिनट’ का वादा

यह विवाद तब और गहरा गया जब केरल राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष के. एस. हमजा ने रविवार को घोषणा की कि मुनंबम की 404 एकड़ विवादित भूमि वक्फ संपत्ति है और इसे केंद्र सरकार के उम्मीद (UMEED) पोर्टल पर पंजीकृत कर दिया गया है।

मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन ने वक्फ बोर्ड के इस कदम को पूरी तरह से “राजनीतिक रूप से प्रेरित” और “समुदायों के बीच दरार पैदा करने की साजिश” करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस बोर्ड का गठन पिछली वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) सरकार के कार्यकाल में हुआ था। सतीशन के मुताबिक, विपक्ष में रहते हुए उन्होंने वादा किया था कि यूडीएफ सरकार आने पर इस मुद्दे को “10 मिनट के भीतर” सुलझा लिया जाएगा, और मौजूदा वक्फ बोर्ड जानबूझकर इस समाधान को रोकने तथा मामले को उलझाने का प्रयास कर रहा है।

नियमों के अनुसार, उम्मीद पोर्टल पर पंजीकरण मुतवल्ली (प्रबंधक) द्वारा किया जाना चाहिए था, लेकिन यहाँ सीधे वक्फ बोर्ड ने पहल की, जिसने सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं।

कैथोलिक चर्च और विपक्ष का कड़ा रुख

वक्फ बोर्ड द्वारा भूमि को उम्मीद पोर्टल पर पंजीकृत करने के बाद ईसाई समुदाय और कैथोलिक चर्च में भारी आक्रोश है। चर्च समर्थित मुखपत्र ‘दीपिका’ ने अपने संपादकीय में इस कदम की तीखी आलोचना की है। उन्होंने इसे धर्मनिरपेक्ष केरल के लिए एक चुनौती बताया है।

दूसरी तरफ, भाजपा (BJP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. सुरेंद्रन ने भी मुख्यमंत्री सतीशन पर निशाना साधते हुए कहा है कि अब जब यूडीएफ सत्ता में आ चुकी है, तो मुख्यमंत्री को प्रदर्शनकारियों और चर्च प्रमुखों से किया अपना “10 मिनट में समाधान” वाला वादा तुरंत पूरा करना चाहिए। भाजपा का दावा है कि केंद्र सरकार द्वारा संशोधित वक्फ अधिनियम ही इस समस्या का स्थायी समाधान दे सकता है।

क्या है मुनंबम विवाद का मुख्य कारण?

मुनंबम के स्थानीय निवासियों (मुनंबम भू संरक्षण समिति) का कहना है कि यह जमीन मूल रूप से फारूक कॉलेज प्रबंधन से कानूनी तौर पर खरीदी गई थी, जिसके वे दशकों से टैक्स चुका रहे हैं। हालांकि, वक्फ बोर्ड का दावा है कि यह जमीन मूल रूप से एक वक्फ बंदोबस्त (Waqf property) का हिस्सा थी। 2019 में इसे अवैध रूप से वक्फ रजिस्टर में शामिल किया गया था। वर्तमान में लोग अपनी ही जमीनों को न तो बेच पा रहे हैं, न ही बैंक में गिरवी रख पा रहे हैं। मुनंबम भू संरक्षण समिति ने अब मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर वर्तमान केरल वक्फ बोर्ड को तुरंत भंग करने की मांग की है।

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