काबुल. दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में एक खतरनाक मोड़ आ गया है। पाकिस्तान ने आधिकारिक तौर पर अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के खिलाफ “खुली जंग” (Open War) की स्थिति घोषित कर दी है। यह घोषणा पाकिस्तान वायुसेना (PAF) द्वारा अफगानिस्तान के प्रमुख शहरों—काबुल, कंधार और पक्तिया—में तालिबान के सैन्य ठिकानों पर किए गए भीषण हवाई हमलों के बाद की गई है।
सर्जिकल स्ट्राइक और भारी नुकसान का दावा
पाकिस्तानी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, उनके लड़ाकू विमानों ने तालिबान के ब्रिगेड मुख्यालय, रणनीतिक सैन्य पोस्ट और गोला-बारूद के डिपो को निशाना बनाया है। रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कड़े शब्दों में कहा कि पाकिस्तान की संप्रभुता पर लगातार हो रहे हमलों के कारण अब “शांति वार्ता का समय समाप्त हो गया है।”
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पाकिस्तानी दावा: इन हमलों में 130 से अधिक तालिबान लड़ाके मारे गए हैं।
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तालिबान का आरोप: तालिबान के प्रवक्ता ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि पाकिस्तान ने सैन्य ठिकानों के साथ-साथ रिहायशी इलाकों को भी निशाना बनाया है, जिसमें नागरिकों की जान गई है।
तालिबान का जवाबी पलटवार
हमलों के कुछ ही घंटों बाद, अफगान रक्षा मंत्रालय ने जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। तालिबान ने सीमावर्ती पाकिस्तानी सैन्य चौकियों पर ड्रोन हमले और जमीनी गोलाबारी की है। डूरंड लाइन (2600 किमी लंबी सीमा) पर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है, जहाँ दोनों ओर से भारी हथियारों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
तनाव के पीछे का मुख्य कारण
विशेषज्ञों का मानना है कि यह संघर्ष पिछले कई महीनों से सुलग रहा था। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
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TTP का मुद्दा: पाकिस्तान का आरोप है कि ‘तहरीक-ए-तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान’ (TTP) अफगानिस्तान की जमीन का उपयोग पाकिस्तान में आतंकी हमलों के लिए कर रहा है।
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सीमा विवाद: तालिबान द्वारा डूरंड लाइन को अंतरराष्ट्रीय सीमा मानने से इनकार करना।
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अक्टूबर 2025 की घटनाएं: अक्टूबर 2025 के बाद से सीमा पर झड़पें और राजनयिक विफलताएं इस युद्ध जैसी स्थिति की मुख्य वजह बनी हैं।
प्रमुख अपडेट्स: एक नज़र में
| श्रेणी | वर्तमान स्थिति |
| सैन्य अलर्ट | पाकिस्तान ने खैबर पख्तूनख्वा और पंजाब प्रांतों में ‘हाई अलर्ट’ जारी किया है। |
| हवाई क्षेत्र | कंधार और सीमावर्ती इलाकों के ऊपर पाकिस्तानी टोही विमान लगातार उड़ान भर रहे हैं। |
| कूटनीतिक स्थिति | पाकिस्तान ने काबुल से अपने राजनयिकों को वापस बुलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। |
वैश्विक प्रतिक्रिया और चिंता
संयुक्त राष्ट्र (UN) ने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की है। रूस, चीन और सऊदी अरब जैसे देशों ने चेतावनी दी है कि यदि यह संघर्ष नहीं रुका, तो यह पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर सकता है। विशेष रूप से चीन के लिए यह चिंता का विषय है क्योंकि उसके अरबों डॉलर के निवेश (CPEC) इस क्षेत्र की सुरक्षा पर निर्भर हैं।
विशेषज्ञों की राय: “यह केवल दो देशों की लड़ाई नहीं है। यदि अफगानिस्तान में अस्थिरता बढ़ती है, तो इसका सीधा असर भारत की सुरक्षा, शरणार्थी समस्या और मध्य एशिया के व्यापारिक मार्गों पर पड़ेगा।”
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