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Middle East Crisis: ईरान के अनुरोध पर झुके ट्रंप? जानें 6 अप्रैल की डेडलाइन का पूरा सच

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वाशिंगटन | शुक्रवार, 27 मार्च 2026

Strait of Hormuz Deadline Extended: मध्य पूर्व (Middle East) में जारी भीषण तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चौंकाने वाला फैसला लिया है। ट्रंप ने ईरानी ऊर्जा संयंत्रों (Energy Plants) पर संभावित विनाशकारी हमलों को 10 दिनों के लिए टालते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की समय सीमा 6 अप्रैल 2026 तक बढ़ा दी है।

राष्ट्रपति ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर घोषणा की कि यह निर्णय “ईरानी सरकार के अनुरोध” पर लिया गया है। ट्रंप ने संकेत दिए कि पर्दे के पीछे बातचीत चल रही है, हालांकि ईरान के आधिकारिक बयानों ने इस पर रहस्य बरकरार रखा है।

ट्रंप का बड़ा दावा: “बातचीत सकारात्मक दिशा में”

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी पोस्ट में लिखा, “ईरान सरकार के अनुरोध पर, मैं ईरानी ऊर्जा संयंत्रों को नष्ट करने की कार्रवाई को 10 दिनों के लिए रोक रहा हूँ। अब नई समय सीमा सोमवार, 6 अप्रैल, रात 8 बजे (पूर्वी समय) तक है।” उन्होंने आगे दावा किया कि “वार्ताएं जारी हैं और बहुत अच्छी तरह से आगे बढ़ रही हैं।”

बाद में एक इंटरव्यू में ट्रंप ने यह भी खुलासा किया कि ईरान ने केवल 7 दिनों की मोहलत मांगी थी, लेकिन उन्होंने उदारता दिखाते हुए 10 दिन का समय दिया है।

ईरान का इनकार: क्या ‘बैक-चैनल’ कूटनीति काम कर रही है?

ट्रंप के दावों के उलट, ईरान के विदेश मंत्रालय ने किसी भी प्रकार की प्रत्यक्ष वार्ता (Direct Talks) से साफ इनकार किया है। ईरान ने इसे अमेरिका की “मनोवैज्ञानिक युद्धनीति” करार दिया है। हालांकि, कूटनीतिक सूत्रों और पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों के बीच ओमान और पाकिस्तान जैसे मध्यस्थों के जरिए अप्रत्यक्ष संदेशों का आदान-प्रदान हो रहा है।

ईरान की शर्तें:

  • अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमलों को तुरंत रोकना।

  • होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की संप्रभुता का सम्मान।

  • युद्ध से हुए नुकसान के लिए मुआवजे की मांग।

क्यों अहम है 6 अप्रैल की तारीख?

फरवरी 2026 में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर किए गए हमलों (ऑपरेशन ‘एपिक फ्युरी’) के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली थी।

  • ग्लोबल ऑयल सप्लाई: दुनिया के कुल कच्चे तेल का लगभग 20% इसी संकरे रास्ते से गुजरता है।

  • कीमतों में उछाल: मार्च 2026 की शुरुआत में तनाव बढ़ने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें $125 प्रति बैरल के पार पहुंच गई थीं।

  • राहत के संकेत: ट्रंप की घोषणा के बाद शुक्रवार को वैश्विक तेल कीमतों में हल्की गिरावट देखी गई है, क्योंकि बाजार को 6 अप्रैल तक कूटनीतिक समाधान की उम्मीद जगी है।

विशेषज्ञों की चेतावनी: “युद्ध या शांति का निर्णायक मोड़”

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि 6 अप्रैल तक होर्मुज जलमार्ग पूरी तरह नहीं खुला, तो अमेरिका ईरान के पावर ग्रिड और तेल रिफाइनरियों को निशाना बना सकता है। इससे न केवल ईरान की अर्थव्यवस्था चरमरा जाएगी, बल्कि वैश्विक ऊर्जा संकट भी पैदा हो सकता है।

फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह 10 दिनों का ‘पॉज’ किसी स्थायी शांति समझौते में बदलेगा या यह आने वाले बड़े तूफान से पहले की शांति है।

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