मुंबई | शनिवार, 18 अप्रैल 2026
टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की नासिक यूनिट में चल रहे कथित यौन उत्पीड़न और धर्मांतरण विवाद ने अब राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी और बैंकिंग प्रोफेशनल अमृता फडणवीस ने इस मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए इसे ‘कॉर्पोरेट जिहाद’ करार दिया है। नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने दावा किया कि उनके पूर्व कार्यस्थल एक्सिस बैंक में भी इसी तरह की उत्पीड़न की घटनाएं सामने आई थीं।
अमृता फडणवीस का बड़ा बयान: ‘चुप्पी समाधान नहीं’
नागपुर में ‘वूमन इंटलेक्चुअल कॉन्फ्रेंस’ को संबोधित करते हुए अमृता फडणवीस ने कहा कि नासिक TCS की घटना बेहद दुखद और चिंताजनक है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा:
“जब मैं एक्सिस बैंक में वाइस प्रेसिडेंट थी, तब वहां भी पुरुष कर्मचारियों द्वारा महिला सहकर्मियों को परेशान करने और अपने पद का दुरुपयोग करने की शिकायतें मिली थीं। लेकिन व्हिसलब्लोअर्स और आंतरिक सतर्कता के कारण दोषियों पर तुरंत कार्रवाई की गई।”
उन्होंने आगे कहा कि यदि हम अपनी संस्कृति और परंपराओं (वेदों-पुराणों) के प्रति जागरूक होते, तो ऐसी घटनाएं नहीं होतीं। उन्होंने इसे ‘लव जिहाद’ और जबरन धर्मांतरण से जोड़ते हुए युवाओं को भारतीय मूल्य अपनाने की सलाह दी।
नासिक TCS विवाद: अब तक की 5 बड़ी अपडेट्स
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SIT की अंडरकवर कार्रवाई: नासिक पुलिस ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। हाल ही में हुए खुलासे के अनुसार, 6 महिला पुलिस अधिकारियों ने 40 दिनों तक कैंपस में ‘अंडरकवर कर्मचारी’ बनकर काम किया और सबूत जुटाए।
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9 FIR और 7 गिरफ्तारियां: पुलिस अब तक इस मामले में 9 अलग-अलग FIR दर्ज कर चुकी है। अब तक 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें टीम लीडर्स और एक HR मैनेजर (अश्विनी चैनानी) शामिल हैं।
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मुख्य आरोपी निदा खान फरार: मामले की मुख्य आरोपी मानी जा रही HR अधिकारी निदा खान फिलहाल फरार है। पुलिस ने उसके घर पर ताला पाया है और उसके पति से पूछताछ की जा रही है। निदा पर आरोप है कि उसने पीड़ितों की शिकायतों को दबाया और उन पर दबाव बनाया।
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TCS की कड़ी कार्रवाई: टाटा समूह के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने इस घटना पर दुख जताते हुए ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति दोहराई है। कंपनी ने आरोपी कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है और COO आरती सुब्रमण्यन के नेतृत्व में एक आंतरिक जांच समिति गठित की है।
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गंभीर आरोप: जांच में सामने आया है कि यह रैकेट 2021-22 से सक्रिय था। पीड़ितों ने आरोप लगाया है कि उन्हें ‘रूफटॉप’ पर अलग-थलग रखा जाता था, उनके फोन छीन लिए जाते थे और उन्हें नमाज पढ़ने व कलमा पढ़ने के लिए मजबूर किया जाता था।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस मामले की बारीकी से निगरानी करने का आश्वासन दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और राज्य सरकार जरूरत पड़ने पर केंद्रीय एजेंसियों की मदद लेने से भी पीछे नहीं हटेगी।
निष्कर्ष: यह विवाद अब केवल एक कंपनी का आंतरिक मामला नहीं रह गया है, बल्कि इसने भारत के कॉर्पोरेट जगत में महिलाओं की सुरक्षा, ‘POSH’ (यौन उत्पीड़न रोकथाम) नियमों की विफलता और वैचारिक दबाव जैसे गंभीर मुद्दों पर बहस छेड़ दी है।
Matribhumisamachar


