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छत्तीसगढ़: राजनांदगांव और मोहला-मानपुर में मतांतरण का ‘मकड़जाल’, ED की रडार पर विदेशी फंडिंग

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रायपुर | बुधवार, 29 अप्रैल 2026

छत्तीसगढ़ के वनांचल क्षेत्रों में पिछले कुछ महीनों से धार्मिक जनसांख्यिकी को बदलने के संगठित प्रयास तेज हो गए हैं। राजनांदगांव और नवगठित जिला मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी वर्तमान में ईसाई मिशनरियों की सक्रियता के मुख्य केंद्र बन चुके हैं। हाल ही में पास्टर डेविड चाको की गिरफ्तारी और अमेरिकी संगठन ‘द टिमोथी इनशिएटिव’ (TTI) से उसके संबंधों ने सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय समाज की चिंता बढ़ा दी है।

TTI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच

सूत्रों के अनुसार, डेविड चाको केवल एक पास्टर नहीं, बल्कि एक सुनियोजित नेटवर्क का हिस्सा है। अमेरिकी संस्था TTI पर आरोप है कि वह भारत में अवैध रूप से फंड भेजकर स्थानीय ‘स्लीपर सेल’ तैयार कर रही है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) अब इस विदेशी फंडिंग के उन रास्तों की जांच कर रहा है, जिनका उपयोग मतांतरण के लिए प्रशिक्षण और सभाओं के आयोजन में किया जा रहा है।

निशाने पर ‘बीमार और लाचार’ परिवार

मिशनरियों ने धर्मांतरण के लिए एक विशेष ‘वर्गीकरण रणनीति’ अपनाई है। आदिवासी नेता लाल लक्ष्मेंद्र शाह के अनुसार, विशेष रूप से उन महिलाओं को निशाना बनाया जा रहा है जो पारिवारिक कलह, बीमारी या आर्थिक तंगी से जूझ रही हैं।

  • रणनीति: मोहला में 2 और मानपुर में 9 ऐसे केंद्र चिह्नित किए गए हैं, जहाँ नियमित प्रार्थना सभाओं के नाम पर अंधविश्वास और चमत्कारिक चंगाई का झांसा दिया जाता है।

  • स्लीपर सेल: प्रशिक्षित प्रचारक गांवों में रहकर ऐसे परिवारों की पहचान करते हैं और उन्हें धीरे-धीरे अपनी मूल आस्था से दूर करते हैं।

केस स्टडी: कैसे बदला जा रहा है समाज का स्वरूप

  • केस 1: राजनांदगांव के राजीव नगर में यादव समाज की एक महिला और उसके दो बेटों का मतांतरण इसका प्रमाण है कि अब मिशनरी केवल दूरस्थ वनांचलों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि शहरी बस्तियों में भी पैठ बना चुके हैं।

  • केस 2: मानपुर में एक महिला को ‘संतान प्राप्ति’ का झांसा देकर प्रार्थना सभा में ले जाया गया, जहाँ मानसिक दबाव और बहकावे में आकर उसने अपना धर्म बदल लिया।

ओबीसी और आदिवासी वर्ग में बढ़ता आक्रोश

सिर्फ आदिवासी ही नहीं, बल्कि अब ओबीसी (OBC) वर्ग के लोग भी इस नेटवर्क का शिकार हो रहे हैं। मुख्यालय के पास स्थित ग्राम पनेका और धर्मापुर के चर्चों में होने वाली संदिग्ध गतिविधियों के खिलाफ स्थानीय ग्रामीणों ने कई बार प्रदर्शन किए हैं।

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