लखनऊ | बुधवार, 13 मई 2026
उत्तर प्रदेश में प्रेशर हॉर्न, मॉडिफाइड साइलेंसर और हूटर बजाकर सड़कों पर शोर मचाने वालों के खिलाफ अब राज्य सरकार और यातायात निदेशालय ने मोर्चा खोल दिया है। नागरिकों की सुविधा और शांति सुनिश्चित करने के लिए यातायात पुलिस एक विशेष मोबाइल एप्लीकेशन (App) विकसित कर रही है, जिसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की सीधी शिकायत कर सकेगा।
कैसे काम करेगा यह नया सिस्टम?
एडीजी (यातायात एवं सड़क सुरक्षा) ए. सतीश गणेश ने जानकारी दी कि डीजीपी राजीव कृष्ण के निर्देशन में इस योजना पर तेजी से काम चल रहा है। इस ऐप की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि:
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साक्ष्य आधारित शिकायत: नागरिक शोर करने वाले वाहनों के फोटो और वीडियो सीधे ऐप पर अपलोड कर सकेंगे।
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त्वरित कार्रवाई: प्राप्त शिकायतों पर ट्रैफिक कंट्रोल रूम तुरंत संज्ञान लेगा और संबंधित वाहन का ऑनलाइन चालान काटा जाएगा।
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विशेषज्ञों की मदद: इस ऐप के विकास में विभिन्न जिलों के तकनीकी विशेषज्ञों और यातायात पुलिस की टीम लगी हुई है।
अब तक की बड़ी कार्रवाई: करोड़ों का वसूला गया जुर्माना
यातायात पुलिस केवल ऐप का इंतजार नहीं कर रही है, बल्कि धरातल पर भी सख्त कार्रवाई जारी है। अप्रैल 2026 में चलाए गए विशेष अभियान के आंकड़े चौंकाने वाले हैं:
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कुल चालान: 17,000 से अधिक वाहनों पर कार्रवाई।
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प्रेशर हॉर्न: 6,039 वाहनों का चालान कर ₹2.42 करोड़ का जुर्माना वसूला गया।
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साइलेंसर व हूटर: 11,000 से अधिक वाहनों से ₹3.97 करोड़ का जुर्माना लिया गया।
नियम तोड़ने वालों के लिए सख्त चेतावनी
नए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के अनुसार, ध्वनि प्रदूषण फैलाने पर न केवल जुर्माना बल्कि जेल की सजा का भी प्रावधान है।
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पहली बार अपराध: ₹10,000 तक का जुर्माना या 3 महीने की जेल।
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दोबारा गलती: ₹10,000 जुर्माना और 6 महीने तक की जेल।
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साइलेंसर मॉडिफिकेशन: मॉडिफाइड साइलेंसर बेचने वाले दुकानदारों और वर्कशॉप मालिकों पर भी ₹1 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
निष्कर्ष
इस डिजिटल पहल से न केवल सड़कों पर अनुशासन आएगा, बल्कि बुजुर्गों, बच्चों और अस्पतालों में भर्ती मरीजों को भी राहत मिलेगी। यातायात निदेशालय का लक्ष्य है कि जल्द से जल्द यह ऐप जनता के लिए उपलब्ध हो जाए।
Matribhumisamachar


