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पश्चिम बंगाल: साल्ट लेक में TMC दफ्तर से मिले 100 से ज्यादा आधार कार्ड, राजनीतिक पारा गरमाया

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टीएमसी कार्यालय में बरामद आधार कार्डों का प्रतीकात्मक चित्र

कोलकाता । रविवार, 17 मई 2026

पश्चिम बंगाल की राजनीति में चुनावों से ठीक पहले एक और बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक विवाद सामने आया है। कोलकाता के पॉश इलाके साल्ट लेक स्थित तृणमूल कांग्रेस (TMC) के एक स्थानीय दफ्तर से बड़ी संख्या में आधार कार्ड और सरकारी जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़े संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए गए हैं। इस घटना के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राज्य की सत्ताधारी पार्टी पर तीखे हमले शुरू कर दिए हैं, जिससे चुनावी माहौल पूरी तरह गरमा गया है। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए सभी दस्तावेजों को अपने कब्जे में ले लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है।

क्या है पूरा मामला? कैसे हुआ खुलासा

यह घटना बिधाननगर नगर निगम (Bidhannagar Municipal Corporation) के वार्ड नंबर 36 के तहत आने वाली बसंती देवी कॉलोनी की है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह विवाद अचानक नहीं बल्कि पिछले कुछ समय से चल रहे असंतोष का नतीजा है।

  • स्थानीय लोगों का दावा: बसंती देवी कॉलोनी और आसपास के गरीब तबके के लोगों का आरोप है कि जब उन्होंने अपने आधार कार्ड बनवाने या अपडेट कराने के लिए आवेदन किया था, तो उनसे संपर्क पते (Contact Address) के रूप में इसी स्थानीय टीएमसी कार्यालय का पता लिखवाया गया था।

  • कार्यालय में तालाबंदी: कई महीनों तक चक्कर काटने के बावजूद जब लोगों को उनके आधार कार्ड नहीं मिले और पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा कथित रूप से टालमटोल की गई, तो स्थानीय निवासियों का गुस्सा फूट पड़ा। 4 मई को नाराज लोगों ने सामूहिक रूप से इस पार्टी कार्यालय पर ताला जड़ दिया।

  • दस्तावेजों की बरामदगी: बाद में जब स्थानीय प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में कार्यालय का ताला खोला गया, तो अंदर से 100 से अधिक नागरिकों के आधार कार्ड और सरकारी जमीनों की खरीद-बिक्री से जुड़े कई महत्वपूर्ण कागजात बरामद हुए।

पुरानी घटनाओं से जुड़े तार: लावारिस आधार कार्डों का रहस्य

यह पहली बार नहीं है जब साल्ट लेक इलाके में इस तरह से भारी मात्रा में पहचान पत्र मिले हों। इस घटना से कुछ ही समय पहले साल्ट लेक के ही एक स्थानीय पार्क के बाहर मॉर्निंग वॉक पर निकले लोगों को बड़ी संख्या में आधार कार्ड लावारिस हालत में सड़क किनारे पड़े मिले थे।

हैरानी की बात यह थी कि उन आधार कार्डों पर पश्चिम बंगाल के बजाय उत्तर प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे राज्यों के पते दर्ज थे। स्थानीय लोगों की सूचना पर बिधाननगर पुलिस ने उन कार्डों को भी जब्त किया था। अब टीएमसी दफ्तर से मिले स्थानीय कार्डों के बाद विपक्ष इन दोनों मामलों को जोड़कर एक बड़े रैकेट का अंदेशा जता रहा है।

राजनीतिक घमासान: भाजपा के आरोप और टीएमसी की सफाई

इस बरामदगी के बाद राज्य में राजनीतिक बयानबाजी चरम पर पहुंच गई है:

1. भाजपा का तीखा हमला:

भाजपा नेतृत्व ने इस घटना को पश्चिम बंगाल में चल रहे कथित ‘फर्जी पहचान पत्र’ और ‘घुसपैठ’ के बड़े मुद्दे से जोड़ा है। भाजपा नेताओं का आरोप है कि सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों और फर्जी मतदाताओं को तैयार करने के लिए सत्ताधारी दल के संरक्षण में यह खेल चल रहा था।

2. टीएमसी का स्पष्टीकरण:

दूसरी ओर, टीएमसी के स्थानीय नेताओं ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है। उनका तर्क है कि झुग्गी-झोपड़ियों या अस्थायी बस्तियों में रहने वाले कई गरीब लोगों के पास अपना कोई स्थायी आवासीय प्रमाण (Address Proof) नहीं होता। ऐसे में जनप्रतिनिधि होने के नाते समाज सेवा के उद्देश्य से या एक केंद्रीय संपर्क केंद्र के रूप में उनके कार्ड पार्टी दफ्तर के पते पर मंगाए गए थे ताकि वे गुम न हों। हालांकि, जमीन के सरकारी दस्तावेजों की मौजूदगी पर पार्टी ने निष्पक्ष जांच की बात कही है।

हुगली में हिंसा: टीएमसी पार्षद राजू पारुई की गिरफ्तारी

साल्ट लेक के इस घटनाक्रम के बीच राज्य के अन्य हिस्सों से भी चुनावी टकराव की खबरें आ रही हैं। हुगली जिले के बैद्यबाटी इलाके में भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट और चुनावी प्रचार में बाधा डालने के आरोप में पुलिस ने टीएमसी पार्षद राजू पारुई को गिरफ्तार किया है।

भाजपा का आरोप है कि जब उनके कार्यकर्ता शांतिपूर्ण तरीके से प्रचार कर रहे थे, तब पार्षद और उनके समर्थकों ने उन पर हमला किया। इस गिरफ्तारी ने विपक्षी दलों को कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर सरकार को घेरने का एक और बड़ा मौका दे दिया है।

निष्कर्ष और आगे की राह

चुनाव के इस दौर में पहचान पत्रों और जमीन के दस्तावेजों का इस तरह मिलना किसी भी राजनीतिक दल के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। क्या यह वाकई केवल गरीब नागरिकों की मदद के लिए किया गया एक प्रयास था, या इसके पीछे जमीन के अवैध कारोबार और फर्जीवाड़े का कोई गंभीर मामला है? इसका सटीक जवाब पुलिस और प्रशासनिक जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ पाएगा। फिलहाल, इस मुद्दे ने मतदाताओं के बीच एक नई बहस जरूर छेड़ दी है।

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