मंगलवार, जुलाई 14 2026 | 02:53:12 PM
Breaking News
Home / राष्ट्रीय / अयोध्या राम मंदिर दान चोरी मामला: सुप्रीम कोर्ट ने SIT से मांगी स्टेटस रिपोर्ट, ट्रस्ट को जारी किया नोटिस

अयोध्या राम मंदिर दान चोरी मामला: सुप्रीम कोर्ट ने SIT से मांगी स्टेटस रिपोर्ट, ट्रस्ट को जारी किया नोटिस

Follow us on:

सुप्रीम कोर्ट नई दिल्ली की इमारत और अयोध्या राम मंदिर का प्रतीकात्मक चित्र जहां एसआईटी स्टेटस रिपोर्ट और ट्रस्ट को नोटिस की कानूनी कार्यवाही चल रही है।

नई दिल्ली । सोमवार, 13 जुलाई 2026

अयोध्या में नवनिर्मित भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और कीमती सामानों की कथित चोरी का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) की चौखट पर पहुंच चुका है। करोड़ों भक्तों की आस्था से जुड़े इस संवेदनशील मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने मामले की जांच कर रही उत्तर प्रदेश सरकार की विशेष जांच दल (SIT) से विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट तलब की है, साथ ही ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’, उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

मामले की अगली सुनवाई अब 20 जुलाई 2026 को होगी।

सुप्रीम कोर्ट की 3 जजों की बेंच ने की सुनवाई

इस बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्या कांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की तीन सदस्यीय विशेष बेंच ने की। कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार का प्रतिनिधित्व सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने किया। उन्होंने अदालत को आश्वासन दिया कि सरकार इस मामले की निष्पक्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया में अदालत की पूरी सहायता करेगी।

बेंच ने स्पष्ट किया कि मामले में दायर याचिकाओं पर आगे कोई भी बड़ा फैसला लेने या विचार करने से पहले, वर्तमान में जांच कर रही एसआईटी (SIT) की स्टेटस रिपोर्ट और उसके सदस्यों की योग्यता व क्रेडेंशियल्स को देखना बेहद जरूरी है।

याचिकाओं में क्या हैं मुख्य मांगें?

अदालत के सामने इस मामले को लेकर कुल 4 याचिकाएं सूचीबद्ध की गई थीं। ये याचिकाएं वकील नरेंद्र कुमार गोस्वामी, वकील अजय कुमार राय, दिनेश कुमार यादव, राजद (RJD) सांसद सुधाकर सिंह और हिंदू धर्म परिषद द्वारा जनहित याचिका (PIL) के रूप में दाखिल की गई हैं। इन याचिकाओं में मुख्य रूप से निम्नलिखित मांगें की गई हैं:

  1. CBI जांच या विशेष SIT का गठन: याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि उत्तर प्रदेश सरकार की प्रशासनिक अधिकारियों वाली एसआईटी बिना किसी एफआईआर (FIR) या नियमित आपराधिक मामला दर्ज किए प्रारंभिक जांच कर रही है, जिसकी कानूनी स्वीकार्यता कमजोर हो सकती है। इसलिए मामले की जांच सीबीआई (CBI) को सौंपी जाए या सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक बहु-विषयक (Multi-Disciplinary) विशेष दल का गठन हो।

  2. लाइव और पारदर्शी डिजिटल ऑडिट: मंदिर को देश-विदेश से मिल रहे नकद, सोने-चांदी की ईंटों, आभूषणों और डिजिटल ट्रांजैक्शंस की पूरी जानकारी आधिकारिक वेबसाइट पर लाइव (सार्वजनिक) की जाए।

  3. स्वतंत्र फोरेंसिक ऑडिट: किसी स्वतंत्र और पेशेवर वैश्विक एजेंसी या कैग (CAG) से ट्रस्ट के गठन (5 फरवरी 2020) से लेकर अब तक के पूरे वित्तीय लेखा-जोखा का फोरेंसिक ऑडिट कराया जाए।

  4. ट्रस्ट की संपत्ति घोषित हो: भक्तों द्वारा चढ़ाए गए हर एक पैसे और आभूषण को ‘पवित्र ट्रस्ट संपत्ति’ (Sacred Trust Property) घोषित किया जाए ताकि इसका दुरुपयोग न हो सके।

क्या है पूरा विवाद?

13 जून 2026 को राम मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने इस कथित हेराफेरी की जांच के लिए लखनऊ के मंडल आयुक्त विजय विश्वास पंत, महानिरीक्षक (IG) किरण एस. और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन की सदस्यता वाली एक उच्च स्तरीय एसआईटी (SIT) का गठन किया था। स्थानीय पुलिस ने इस मामले में अब तक 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा है। इस विवाद के बीच ही ट्रस्ट के कुछ शीर्ष पदाधिकारियों के इस्तीफे की खबरें भी सामने आई हैं, जिसने विपक्षी दलों और आम श्रद्धालुओं के बीच पारदर्शिता को लेकर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर दान चोरी मामले की सुनवाई किस बेंच ने की?

Ans: इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्या कांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की 3 जजों की पीठ ने की है।

Q2. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में क्या आदेश दिया है?

Ans: सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार द्वारा गठित एसआईटी (SIT) से जांच की स्टेटस रिपोर्ट और टीम के सदस्यों की जानकारी मांगी है। साथ ही राम मंदिर ट्रस्ट और सरकारों को नोटिस जारी किया है।

Q3. मामले की अगली सुनवाई कब होगी?

Ans: सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर अगली सुनवाई 20 जुलाई 2026 को करेगा।

Q4. याचिकाकर्ता अदालत से क्या चाहते हैं?

Ans: याचिकाकर्ता इस पूरे कथित घोटाले की सीबीआई (CBI) जांच, ट्रस्ट के खातों का स्वतंत्र फोरेंसिक ऑडिट और दान राशि को आधिकारिक वेबसाइट पर लाइव सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं।

Disclaimer (अस्वीकरण): यह लेख उपलब्ध कानूनी दस्तावेजों, अदालती कार्यवाहियों और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। इस मामले में लगे आरोप अभी जांच के अधीन हैं और जब तक अदालत का अंतिम फैसला नहीं आता, किसी को भी दोषी नहीं माना जा सकता।

मित्रों,
मातृभूमि समाचार का उद्देश्य मीडिया जगत का ऐसा उपकरण बनाना है, जिसके माध्यम से हम व्यवसायिक मीडिया जगत और पत्रकारिता के सिद्धांतों में समन्वय स्थापित कर सकें। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए हमें आपका सहयोग चाहिए है। कृपया इस हेतु हमें दान देकर सहयोग प्रदान करने की कृपा करें। हमें दान करने के लिए निम्न लिंक पर क्लिक करें -- Click Here


* 1 माह के लिए Rs 1000.00 / 1 वर्ष के लिए Rs 10,000.00

Contact us

Check Also

वोटर आईडी के नए नियम: पहली बार वोट बनाने वालों के लिए फॉर्म-6 में बड़ा बदलाव, माता-पिता की SIR डिटेल्स हुई जरूरी

नई दिल्ली । रविवार, 12 जुलाई 2026 डिजिटल होते भारत में अब चुनाव आयोग (Election …