
-आरजी स्टोन यूरोलॉजी एंड लैप्रोस्कोपी हॉस्पिटल, कोलकाता में गायनेकोलॉजी कंसल्टेंट डॉ सुदेशना साहा
कोलकाता, अगस्त 2026: पीरियड्स में दर्द होना अक्सर औरतों का सामान्य हिस्सा माना जाता है। कई औरतें दर्द से छुटकारा पाने के लिए बस पेनकिलर ले लेती हैं और अपने रोज़ के काम करती रहती हैं। लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि पीरियड्स में तेज़, गंभीर या परेशान करने वाला दर्द नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह एंडोमेट्रियोसिस का शुरुआती संकेत हो सकता है। एंडोमेट्रियोसिस एक लंबे समय तक चलने वाली गाइनेकोलॉजिकल बीमारी है। इस बीमारी में यूट्रस की लाइनिंग जैसा टिशू यूट्रस के बाहर बढ़ने लगता है। इससे कुछ औरतों में सूजन, तेज़ दर्द और फर्टिलिटी की समस्याएँ हो सकती हैं। एक रिसर्च का अनुमान है कि दुनिया भर में रिप्रोडक्टिव उम्र की लगभग 247 मिलियन औरतें, जिनमें भारत की 42 मिलियन औरतें शामिल हैं, एंडोमेट्रियोसिस से प्रभावित हैं। इतनी ज़्यादा औरतों के प्रभावित होने के बावजूद भारत में इस बीमारी के बारे में जागरूकता कम है।
गायनेकोलॉजी कंसलटेंट डॉ सुदेशना साहा ने बताया, “सबसे बड़ी गलतफहमियों में से एक यह है कि पीरियड्स का दर्द ऐसी चीज़ है जिसे हर महिला को सहना ही पड़ता है। असल में जब दर्द बहुत ज़्यादा होता है, हर साइकिल में बार-बार होता है, या धीरे-धीरे यह दर्द गंभीर होता जाता है, तो इसकी सही जांच होनी चाहिए। जल्दी पहचान होने से महिलाओं को यह समझने में मदद मिल सकती है कि उनके शरीर में क्या हो रहा है और वे इलाज, फर्टिलिटी और लंबे समय की सेहत के बारे में सोच-समझकर फ़ैसले ले सकती हैं।”
कारण और रिस्क फैक्टर
रेट्रोग्रेड पीरियड्स दर्द का सबसे बड़ा कारण है। इसमें पीरियड्स के दौरान निकलने वाला खून पूरी तरह योनि के रास्ते बाहर जाने के बजाय पेल्विक एरिया में वापस चला जाता है।
जेनेटिक कारण, उन महिलाओं में इसका खतरा ज़्यादा होता है जिनकी मां या बहन को एंडोमेट्रियोसिस है।
हार्मोनल फैक्टर, खासकर एस्ट्रोजन के लंबे समय तक संपर्क में रहने से भी पीरियड्स का दर्द होता है।
इम्यून सिस्टम में गड़बड़ी होने के कारण शरीर गर्भाशय (यूट्रस) के बाहर मौजूद एंडोमेट्रियल टिश्यू को साफ नहीं कर पाता।
देर से बच्चे पैदा करना या पहली प्रेग्नेंसी की उम्र बढ़ना भी दर्द का बड़ा कारण है। इससे जीवन में पीरियड्स की कुल संख्या बढ़ सकती है।
यह समस्या क्यों पकड़ में नहीं आती है?
दर्दनाक पीरियड्स को सामान्य माना जाता है। कई लड़कियों को यह विश्वास दिलाया जाता है कि ऐंठन सिर्फ़ पीरियड्स का हिस्सा है और इसके साथ “एडजस्ट” करना पड़ता है।
हर महिला में एंडोमेट्रियोसिस के लक्षण एक जैसे नहीं होते। किसी महिला को बहुत तेज दर्द हो सकता है, जबकि बीमारी कम गंभीर हो। वहीं, किसी दूसरी महिला में बीमारी ज्यादा बढ़ी हुई हो सकती है, लेकिन दर्द बहुत कम या बिल्कुल न हो।
स्टैंडर्ड चेक-अप और जनरल डॉक्टर के पास जाने पर पीरियड्स के लक्षणों की विधिवत की शायद ही कभी जांच होती है, जांच तभी होती है जब कोई महिला खास तौर पर चिंता जताए।
भारत में पीरियड्स और पेल्विक (पेट के निचले हिस्से) से जुड़ी समस्याओं के बारे में जागरूकता कम है। साथ ही, कई महिलाएं इन लक्षणों के बारे में बात करने में झिझकती हैं। इस वजह से वे डॉक्टर से सलाह लेने में देर कर देती हैं।
कई महिलाएं डॉक्टर से तब कंसल्ट करती हैं जब दर्द की वजह से उनकी सेहत, दिनचर्या, काम, पढ़ाई या गर्भावस्था की योजना प्रभावित होती है।
किन्हें जांच करवानी चाहिए
जिन महिलाओं को पीरियड्स के दौरान इतना तेज दर्द होता है कि उनका काम, कॉलेज, एक्सरसाइज या रोज़मर्रा की सामाजिक गतिविधियां प्रभावित होने लगती हैं।
जिन महिलाओं को पीरियड्स के दर्द को कम करने के लिए बार-बार दर्द की दवा लेनी पड़ती है।
जिन महिलाओं में दर्द बद से बदतर हो गया हो।
जिन महिलाओं को पीरियड्स के दौरान या उसके आसपास सेक्स, मल त्यागने या पेशाब करते समय दर्द होता है।
जिन महिलाओं को बहुत ज्यादा या अनियमित पीरियड्स, लगातार पेल्विक (पेट के निचले हिस्से) में दर्द या पेट फूलने की समस्या रहती है।
जिन महिलाओं को गर्भधारण करने मे दिक्कत होती है।
सावधानियां और देखभाल के उपाय
अगर पीरियड्स का दर्द बार-बार आपकी रोज़मर्रा की जिंदगी को प्रभावित करता है, तो इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज न करें। सालों तक चुपचाप दर्द सहने के बजाय अपने गायनेकोलॉजिस्ट से कंसल्ट करें।
पीरियड्स से जुड़े लक्षणों की डायरी रखें। इसमें दर्द की गंभीरता और दर्द कितने समय तक रहा, ब्लीडिंग का पैटर्न, मल या पेशाब से जुड़ी परेशानी और रोज़मर्रा के कामों पर इसका असर जरूर लिखें।
अगर लक्षण लगातार बने रहें, तो सिर्फ दर्द की दवाओं पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से जांच करवाएं। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर उचित इमेजिंग टेस्ट भी सलाह दे सकते हैं।
अगर आप गर्भधारण की योजना बना रही हैं और लगातार पीरियड्स के दर्द के लक्षण बने हुए हैं, तो जांच में देरी न करें। अपने गायनेकोलॉजिस्ट से समय पर बात करें और अपनी गर्भावस्था की योजना के बारे में उन्हें बताएं।
यह समझना महत्वपूर्ण है कि एंडोमेट्रियोसिस से पीड़ित कई महिलाएं प्राकृतिक रूप से गर्भधारण कर सकती हैं। इससे गर्भधारण में परेशानी हो सकती है, लेकिन ऐसा हर महिला के साथ हो, यह जरूरी नहीं है।
यह समझना जरूरी है कि एंडोमेट्रियोसिस का इलाज हर महिला के लिए अलग हो सकता है। इसमें दवाएं, हार्मोनल ट्रीटमेंट, दर्द को नियंत्रित करने के उपाय और कुछ मामलों में सर्जरी शामिल हो सकती है।
एंडोमेट्रियोसिस को अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है, लेकिन अगर इसका जल्दी पता चल जाए तो इसका अच्छी तरह से इलाज़ किया जा सकता है। पीरियड्स के तेज़ या बिगड़ते दर्द को सामान्य समझकर नज़रअंदाज़ न करें। मेडिकल सलाह लेने से इसका जल्दी पता चलने, सही इलाज और बेहतर प्रजनन और संपूर्ण स्वास्थ्य में मदद मिल सकती है।
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