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हिंसा के विरोध में प्रदर्शन कर रहे सुकांत मजूमदार घायल होने का बाद अस्पताल में भर्ती

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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कोलकाता. पश्चिम बंगाल के संदेशखाली में महिलाओं के साथ कथित यौन शोषण और हिंसा के खिलाफ भाजपा का प्रदर्शन जारी है। हालांकि, उत्तर 24 परगना के बशीरहाट में पुलिस और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच झड़प के दौरान पुलिस लाठीचार्ज में पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजूमदार घायल हो गए। घायल सुकांत मजूमदार को बशीरहाट मल्टी-फैसिलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालांकि, यहां भी उनकी हालत में सुधार नहीं हो पाया जिसके बाद उन्हें कोलकाता के अपोलो अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।

ममता बनर्जी और पुलिस डरी हुई है- मजूमदार 

पश्चिम बंगाल बीजेपी प्रमुख सुकांत मजूमदार ने इससे पहले कहा था कि सीएम ममता बनर्जी और पुलिस डरी हुई है और यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है कि संदेशखाली की घटना सामने न आए। यही कारण है कि क्षेत्र में बार-बार धारा 144 लगाई जा रही है। ये इस तरह से लगाया गया कि कोई भी विपक्षी नेता या सामाजिक संगठन वहां नहीं जा सके।

हिंदुओं को गुप्त रूप से प्रार्थना करनी पड़ती है- मजूमदार 

पश्चिम बंगाल के भाजपा प्रमुख सुकांत मजूमदार ने कहा है कि बशीरहाट और पश्चिम बंगाल के कई अन्य स्थानों पर हिंदुओं को गुप्त रूप से प्रार्थना करनी पड़ती है। दुर्गा पूजा के दौरान मूर्ति विसर्जन को ममता बनर्जी पहले ही रोक चुकी हैं, उन्होंने एक बार तारीख में भी बदलाव किया है। यह ममता बनर्जी की गंदी राजनीति है। वह केवल तुष्टीकरण की राजनीति के बारे में सोचती हैं, लोगों के विकास के बारे में नहीं। उन्होंने कहा था कि मैं संदेशखाली जाने की कोशिश करूंगा, देखूंगा कि क्या पुलिस मुझे रोकने की कोशिश करती है। हालांकि, इसके बाद मजूमदार लाठीचार्ज में घायल हो गए।

इस्तीफा दें ममता बनर्जी- भाजपा

पश्चिम बंगाल के संदेशखालि क्षेत्र में महिलाओं के यौन उत्पीड़न के दावों पर विरोध प्रदर्शनों और झड़पों के मद्देनजर भारतीय जनता पार्टी ने बुधवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से इस्तीफे की मांग की है। पार्टी ने आरोप लगाया कि राज्य में जंगलराज कायम है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस के शासन में पश्चिम बंगाल में ‘पूर्ण अराजकता व्याप्त’ है और मुख्यमंत्री बनर्जी संदेशखालि में आदिवासी महिलाओं के साथ बलात्कार और उनका शोषण करने वाले अपनी पार्टी के ‘गुंडों’ को संरक्षण दे रही हैं।

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साभार : इंडिया टीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।