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टिकट मिलने के बाद भी पंजाब से आप सांसद सुशील कुमार रिंकू भाजपा में शामिल

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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चंडीगढ़. पंजाब लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections) से पहले नेताओं का पाला बदलने का सिलसिला जारी है. मंगलवार को कांग्रेस के एक सांसद ने बीजेपी का दामन थाम लिया और आज  आम आदमी पार्टी (AAP) को बड़ा झटका लगा है. सांसद सुशील कुमार रिंकू (Sushil Kumar Rinku) और जालंधर ईस्ट से आम आदमी पार्टी के विधायक शीतल अंगूरल बीजेपी में शामिल हो गए. रिंकू को आप ने जालंधर से टिकट देने की घोषणा कर दी थी.

पंजाब में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस दोनों अलग-अलग चुनाव लड़ रही है. सुशील कुमार रिंकू पहले कांग्रेस में रह चुके हैं और उन्होंने जालंधर पश्चिम सीट से 2017 में विधानसभा चुनाव जीता था. हालांकि 2023 में जालंधर सीट पर हुए उपचुनाव में आप ने उन्हें जालंधर  से प्रत्याशी बनाया था और वह पिछले एक साल से इस सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं.

अंगुरल ने रिंकू को विधानसभा चुनाव में दी थी मात

शीतल अंगुरल वहीं है जिन्होंने 2022 विधानसभा चुनाव में सुशील कुमार रिंकू को हराया था. हालांकि इस हार के बाद रिंकू आप में शामिल हो गए थे. शीतल अंगुरल जालंधर पश्चिम सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं. अंगुरल पेशे से राजनीतिज्ञ है और दो साल पहले ही चुनावी राजनीति में हाथ आजमाया था. बता दें कि मंगलवार को ही लुधियाना से कांग्रेस सांसद रवनीत सिंह बिट्टू ने बड़ा फैसला लेते हुए बीजेपी ज्वाइन कर ली थी. उन्होंने कहा था कि वह पंजाब और केंद्र के बीच के गैप को पाटना चाहते हैं इसलिए बीजेपी में आए हैं.

टिकट देने के बाद भी लिया इतना बड़ा फैसला

आप के दो बड़े नेताओं ने ऐसे समय में देश की सत्तारूढ़ पार्टी ज्वाइन करने का फैसला किया है जब आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय कन्वीनर अरविंद केजरीवाल को ईडी ने आबकारी नीति मामले में गिरफ्तार कर लिया है और वह छह दिनों की रिमांड पर हैं. बता दें कि पंजाब में लोकसभा की 13 सीटें हैं जहां आप और कांग्रेस ने अलग-अलग चुनाव लड़ने का फैसला किया है. आप ने अब तक 8 सीटों पर प्रत्याशी उतार दिए हैं जिनमें रिंकू का नाम भी शामिल है.

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साभार : एबीपी न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।