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कानपुर ट्रैफिक पुलिस का महा-अभियान: जनवरी में 10,000 से अधिक चालान, ओवरस्पीडिंग पर सबसे सख्त प्रहार

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कानपुर में ओवरस्पीडिंग चेक करती ट्रैफिक पुलिस की टीम और स्पीड गन।

कानपुर. औद्योगिक नगरी कानपुर की सड़कों को सुरक्षित बनाने के लिए कानपुर ट्रैफिक पुलिस ने अब तक का सबसे बड़ा और सख्त अभियान छेड़ दिया है। साल 2026 की शुरुआत के साथ ही पुलिस ने नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, केवल जनवरी 2026 में पुलिस ने 10,108 वाहनों का चालान काटकर अनुशासन की नई इबारत लिखी है।

ओवरस्पीडिंग बनी सबसे बड़ी चुनौती: 60% चालान केवल तेज रफ्तार पर

ट्रैफिक पुलिस की रिपोर्ट के मुताबिक, शहर में सबसे ज्यादा जानलेवा लापरवाही ‘ओवरस्पीडिंग’ के रूप में सामने आ रही है। विशेष अभियान के दौरान किए गए कुल चालानों का वर्गीकरण कुछ इस प्रकार है:

  • ओवरस्पीडिंग: 6,297 चालान (सर्वाधिक)

  • नो-पार्किंग: 1,307 चालान

  • बिना हेलमेट: 996 चालान

  • रॉन्ग साइड ड्राइविंग: 938 चालान

तुलनात्मक वृद्धि: नवंबर 2025 में जहां मात्र 2,267 चालान हुए थे, वहीं जनवरी 2026 तक आते-आते यह संख्या 4 गुना से भी ज्यादा बढ़ गई है। यह पुलिस की बढ़ी हुई सक्रियता का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

हाईटेक हुई कानपुर पुलिस: 20 विशेष टीमें और आधुनिक उपकरण

शहर के 18 थाना क्षेत्रों में यातायात व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए 20 विशेष टीमें मैदान में उतारी गई हैं। इन टीमों की खासियत यह है कि ये केवल चालान काटने तक सीमित नहीं हैं:

  1. स्पीड गन और ब्रीथ एनालाइज़र: शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों और रेस लगाने वालों पर पैनी नजर।

  2. बॉडी कैमरा: पुलिस और जनता के बीच पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए।

  3. प्राथमिक उपचार किट: किसी भी दुर्घटना की स्थिति में ‘गोल्डन आवर’ (दुर्घटना के तुरंत बाद का समय) में घायल की जान बचाने के लिए टीमें प्राथमिक चिकित्सा देने में भी सक्षम हैं।

सड़कों पर दिख रहा बदलाव: कम हुई मौतों की संख्या

सख्ती का सीधा असर अब शहर के अस्पतालों और पोस्टमार्टम हाउसों के बाहर कम होती भीड़ के रूप में दिख रहा है। आंकड़ों की तुलना करें तो:

  • हादसे: जनवरी 2025 के 37 हादसों की तुलना में जनवरी 2026 में केवल 24 हादसे हुए।

  • मृत्यु दर: मृतकों की संख्या 26 से घटकर 17 रह गई है।

  • घायल: घायलों की संख्या में 60% की कमी आई है (23 से घटकर 9)।

ई-रिक्शा और ऑटो के लिए ‘QR कोड’ अनिवार्य

फरवरी 2026 से शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए ज़ोन-आधारित QR कोड सिस्टम को कड़ाई से लागू कर दिया गया है।

  • अब तक 65,000 ई-रिक्शा और ऑटो का सत्यापन पूरा हो चुका है।

  • नियम के मुताबिक, यदि कोई चालक अपने आवंटित ज़ोन से बाहर वाहन चलाते पाया जाता है या बिना QR कोड के सड़क पर उतरता है, तो उसका वाहन तत्काल जब्त (Seize) कर लिया जाएगा।

जनहित में अपील

कानपुर ट्रैफिक पुलिस का यह अभियान स्पष्ट संदेश देता है कि नियम तोड़ना अब महंगा पड़ेगा। विभाग का लक्ष्य चालान से राजस्व वसूलना नहीं, बल्कि कानपुर की सड़कों को ‘एक्सीडेंट फ्री’ बनाना है। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपनी और दूसरों की सुरक्षा के लिए सीटबेल्ट, हेलमेट और गति सीमा का विशेष ध्यान रखें।

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