जम्मू. कश्मीर की राजनीति को झकझोर देने वाले चर्चित भाजपा नेता वसीम बारी हत्याकांड में एक बड़ा कानूनी मोड़ आया है। बांडीपोर स्थित विशेष NIA (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) अदालत ने इस मामले में गिरफ्तार तीन आरोपियों को ‘संदेह का लाभ’ देते हुए बरी कर दिया है।
अदालत ने अपने 89 पन्नों के विस्तृत फैसले में जांच एजेंसी और अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए सबूतों को “कानूनी कसौटी पर कमजोर” करार दिया। आइए जानते हैं क्या था यह पूरा मामला और किन वजहों से आरोपियों को रिहाई मिली।
⚖️ कोर्ट ने क्यों दी रिहाई? (फैसले के मुख्य बिंदु)
विशेष न्यायाधीश मीर वजाहत ने फैसले में स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ दोष साबित करने में पूरी तरह विफल रहा। अदालत ने निम्नलिखित तकनीकी और कानूनी खामियां गिनाईं:
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डिजिटल साक्ष्य की विफलता: पुलिस ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) पेश किए थे, लेकिन भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65-B के तहत आवश्यक प्रमाणपत्र मौजूद नहीं था। इसके बिना डिजिटल सबूतों की कोई कानूनी मान्यता नहीं होती।
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स्वतंत्र गवाहों की अनुपस्थिति: तलाशी और मोबाइल/पोस्टर की बरामदगी के समय किसी भी बाहरी या स्वतंत्र गवाह को शामिल नहीं किया गया था।
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आतंकी लिंक साबित करने में नाकाम: अदालत ने कहा कि जो पोस्टर और डेटा बरामद किए गए, वे यह साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं कि आरोपी किसी आतंकी संगठन की गतिविधियों को जानबूझकर आगे बढ़ा रहे थे।
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विरोधाभासी बयान: गवाहों के बयानों में आपसी तालमेल की कमी पाई गई।
🌑 8 जुलाई 2020: वो खौफनाक शाम
यह हत्याकांड 8 जुलाई 2020 को हुआ था। आतंकियों ने बांडीपोर के तत्कालीन जिला भाजपा अध्यक्ष वसीम बारी, उनके पिता बशीर अहमद और भाई उमर बशीर की उनके घर और दुकान के पास ही गोलियों से भूनकर हत्या कर दी थी। उस वक्त बारी की सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मी कथित तौर पर मौजूद नहीं थे, जिसे लेकर भारी आक्रोश देखा गया था।
इस घटना के बाद पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए अबरार गुलजार खान, मुनीर अहमद शेख और मोहम्मद वकार लोन को गिरफ्तार किया था, जिन्हें अब करीब 5 साल बाद बरी कर दिया गया है।
NIA की बड़ी कार्रवाइयों पर विस्तृत रिपोर्ट
🔍 हमलावरों का क्या हुआ?
पुलिस जांच के अनुसार, इस हमले में चार मुख्य हमलावर शामिल थे:
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सज्जाद अहमद मीर (हैदर) और अबु उस्मान: ये दोनों आतंकी बारामुला के करीरी में हुई एक मुठभेड़ में पहले ही मारे जा चुके हैं।
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आबिद राशिद डार और आजाद अहमद शाह: ये दोनों आरोपी अभी भी फरार हैं और सुरक्षा एजेंसियां इनकी तलाश कर रही हैं।
UAPA कानून: क्या है धारा 39 और इसके प्रावधान?
📌 UAPA की धारा 39 और कानूनी चुनौतियां
आरोपियों पर गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की धारा 39 के तहत मामला दर्ज था, जो किसी आतंकी संगठन को सहायता प्रदान करने से संबंधित है। हालांकि, कश्मीर में हाल के वर्षों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहाँ तकनीकी साक्ष्यों (जैसे कि डिजिटल सर्टिफिकेट) की कमी के कारण मामले अदालत में टिक नहीं पा रहे हैं।
वसीम बारी हत्याकांड का यह फैसला जांच एजेंसियों के लिए एक सबक की तरह है कि डिजिटल युग में केवल गिरफ्तारी और बरामदगी काफी नहीं है, बल्कि कानूनी प्रक्रियाओं (जैसे धारा 65-B) का पालन करना अनिवार्य है।
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