चंडीगढ़ | रविवार, 10 मई 2026
शनिवार को दिल्ली की साकेत कोर्ट में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जवाद अहमद सिद्दीकी की हिरासत की मांग की। कोर्ट ने दलीलों को सुनने के बाद सिद्दीकी को तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेजने की अनुमति दे दी। जवाद अहमद सिद्दीकी, जो अल-फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन और तर्बिया एजुकेशन फाउंडेशन के डायरेक्टर हैं, को 24 मार्च को 493 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया गया था।
ED की चार्जशीट और गंभीर आरोप
प्रवर्तन निदेशालय पहले ही इस मामले में चार्जशीट दाखिल कर चुका है। जांच एजेंसी के अनुसार:
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अवैध उगाही: अल-फलाह ट्रस्ट और उससे जुड़े संस्थानों ने छात्रों के एडमिशन और फीस के नाम पर लगभग 493.24 करोड़ रुपये जुटाए। ईडी का दावा है कि यह पूरी राशि “Proceeds of Crime” यानी अपराध के जरिए कमाई गई संपत्ति है।
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दस्तावेजों में हेराफेरी: संस्थानों के लिए हरियाणा सरकार से Essentiality Certificate और नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) से अनुमति प्राप्त करने के दौरान गलत जानकारी और फर्जी दस्तावेज पेश किए गए।
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शेल कंपनियों का इस्तेमाल: ईडी ने कोर्ट को बताया कि छात्रों से जुटाए गए पैसे को ‘अमला एंटरप्राइजेज LLP’, ‘करकुन कंस्ट्रक्शंस एंड डेवलपर्स’ और ‘दियाला कंस्ट्रक्शन’ जैसी निजी कंपनियों में ट्रांसफर किया गया। ये कंपनियां सिद्दीकी के परिवार और करीबी कर्मचारियों के नाम पर थीं।
मान्यता को लेकर भ्रामक जानकारी
जांच में यह भी सामने आया है कि यूनिवर्सिटी ने NAAC और UGC से जुड़ी अपनी मान्यता के बारे में गलत जानकारी फैलाई। आरोप है कि संस्थानों ने अपनी ग्रेडिंग को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया ताकि छात्र और अभिभावक उन पर भरोसा करें और भारी-भरकम फीस जमा करें। यूजीसी ने स्पष्ट किया है कि यूनिवर्सिटी ने धारा 12(B) के तहत मान्यता के लिए कभी सही प्रक्रिया पूरी नहीं की थी।
जमानत याचिका खारिज
जवाद अहमद सिद्दीकी की मुश्किलें तब और बढ़ गईं जब 2 मई को एडिशनल सेशंस जज (ASJ) शीतल चौधरी प्रधान ने उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने माना कि प्रथम दृष्टया आरोपी ने अपनी शैक्षणिक संस्थाओं का इस्तेमाल निजी और व्यावसायिक लाभ के लिए किया है, जो कानूनन गलत है।
Matribhumisamachar


