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अंधविश्वास का मायाजाल: झाड़-फूंक के बहाने महिला का अपहरण, गढ़वा में ग्रामीणों ने मौलाना को रंगे हाथ पकड़ा

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

रांची । शनिवार, 9 मई 2026 

झारखंड के गढ़वा जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने समाज में गहरे तक पैठे अंधविश्वास और उसके आड़ में होने वाले अपराधों को फिर से चर्चा में ला दिया है। धुरकी थाना क्षेत्र के बीरबल गांव में ग्रामीणों की सूझबूझ से एक विवाहित महिला और उसके दो माह के मासूम बच्चे को सुरक्षित बचाया गया, जिन्हें एक मौलाना झाड़-फूंक के बहाने उत्तर प्रदेश से भगाकर लाया था।

घटना का पूरा घटनाक्रम

मामला शुक्रवार सुबह का है जब बीरबल गांव के ग्रामीणों ने स्थानीय निवासी कलाम अंसारी के घर पर एक बाहरी मौलाना और एक अज्ञात महिला को संदिग्ध अवस्था में देखा। महिला की गोद में एक छोटा बच्चा भी था। गांव में बाहरी लोगों की मौजूदगी और संदिग्ध व्यवहार को देखते हुए ग्रामीणों ने तुरंत इसकी सूचना स्थानीय जनप्रतिनिधियों और धुरकी थाना पुलिस को दी।

सगमा प्रखंड प्रमुख अजय साह की मौजूदगी में जब पूछताछ शुरू हुई, तो मामला पूरी तरह से पलट गया। आरोपी की पहचान अकबर अंसारी (निवासी ओबरा, सोनभद्र, यूपी) के रूप में हुई, जबकि महिला ने अपना नाम प्रीति दीक्षित बताया।

इलाज के नाम पर दिया गया धोखा

पूछताछ के दौरान पीड़िता ने जो खुलासा किया वह रोंगटे खड़े कर देने वाला है। महिला ने बताया कि वह अक्सर बीमार रहती थी, जिसका फायदा उठाकर मौलाना ने उसे ‘इलाज और झाड़-फूंक’ के जाल में फँसाया। उसने महिला को बेहतर भविष्य और बीमारी ठीक करने का झांसा देकर घर छोड़ने पर मजबूर किया और उसे चोरी-छिपे झारखंड ले आया।

पति के बयान से खुली पोल

पुलिस द्वारा महिला के पति मुकेश दीक्षित से संपर्क करने पर पता चला कि परिवार पिछले दो दिनों से उसकी तलाश कर रहा था। पति ने बताया कि यह मौलाना झाड़-फूंक के बहाने उनके घर आता-जाता था और उसने विश्वासघात करते हुए उनकी पत्नी को अगवा कर लिया।

पुलिस की भूमिका और वर्तमान स्थिति

धुरकी थाना प्रभारी जनार्दन राऊत ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी मौलाना को हिरासत में ले लिया है। पुलिस के अनुसार:

  • यह मामला अपहरण और धोखाधड़ी की धाराओं के तहत दर्ज किया जा रहा है।

  • पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या आरोपी किसी संगठित गिरोह का हिस्सा है जो इसी तरह भोली-भाली महिलाओं को अपना शिकार बनाता है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।