धनुर्वेद, यजुर्वेद का उपवेद, केवल शस्त्र चलाने की विद्या नहीं थी, बल्कि यह मन्त्र विज्ञान, मानसिक अनुशासन, श्वसन नियंत्रण और नैतिक युद्ध दर्शन का अत्यंत उन्नत समन्वय था। प्राचीन भारत में युद्ध को केवल शारीरिक संघर्ष नहीं, बल्कि चेतना, आत्मसंयम और धर्म की परीक्षा माना जाता था। आज जब दुनिया …
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