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Bihar News: नवादा के 143 साल पुराने मंदिर में मिला ज्ञान का खजाना, 18 दुर्लभ पांडुलिपियों का अब AI तकनीक से होगा कायाकल्प

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नवादा के मंदिर में मिली प्राचीन ताड़पत्र पांडुलिपि।

पटना | रविवार, 19 अप्रैल 2026

बिहार की ऐतिहासिक धरती एक बार फिर अपनी प्राचीन विरासत को लेकर चर्चा में है। नवादा जिले के वारिसलीगंज प्रखंड स्थित चांदीपुर गांव के श्री ठाकुर राधा रमण लाल जी मंदिर में 18 अत्यंत दुर्लभ पांडुलिपियां (Manuscripts) मिली हैं। 1883 में निर्मित इस मंदिर के गर्भगृह और परिसरों में छिपे इन ऐतिहासिक दस्तावेजों को अब भारत सरकार के ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के तहत डिजिटल रूप से अमर किया जाएगा।

सर्वेक्षण में मिलीं ताड़पत्र और भोजपत्र की अनमोल कृतियां

शनिवार, 18 अप्रैल को डिप्टी डेवलपमेंट कमिश्नर (DDC) नीलिमा साहू के नेतृत्व में मंदिर का विस्तृत सर्वेक्षण किया गया। इस दौरान विशेषज्ञों की टीम को 18 ऐसी पांडुलिपियां मिलीं, जो न केवल हस्तलिखित हैं बल्कि कुछ विशेष ब्लॉक प्रिंटेड भी हैं।

  • प्राचीन स्वरूप: ये पांडुलिपियां ताड़ के पत्तों, भोजपत्र और अत्यंत नाजुक कागज पर लिखी गई हैं।

  • संभावित विषय: प्रारंभिक जांच के अनुसार, इन ग्रंथों में आयुर्वेद, पारंपरिक चिकित्सा (Old Medicine), खगोल विज्ञान (Astronomy), साहित्य, दर्शन और नवादा के स्थानीय इतिहास से जुड़ी ऐसी जानकारियां हो सकती हैं जो अब तक दुनिया की नजरों से ओझल थीं।

क्या है ‘ज्ञान भारतम मिशन’ और कैसे होगा संरक्षण?

केंद्र सरकार ने बजट 2025-26 में इस फ्लैगशिप मिशन की घोषणा की थी, जिसका उद्देश्य देशभर में बिखरी पांडुलिपियों को सहेजना है। नवादा की इन पांडुलिपियों को अब इसी मिशन के राष्ट्रीय डिजिटल संग्रह का हिस्सा बनाया जाएगा।

  1. AI तकनीक का उपयोग: इन पांडुलिपियों की लिपि पुरानी और कई जगह से धुंधली हो चुकी है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और उन्नत स्कैनिंग तकनीक की मदद से इन्हें साफ कर डिजिटल फॉर्मेट में बदला जाएगा।

  2. वैज्ञानिक पद्धति: जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कागजों की नाजुकता को देखते हुए वैज्ञानिक तरीके से इनका संरक्षण किया जाएगा ताकि ये भविष्य में खराब न हों।

  3. स्वामित्व बरकरार: जिला प्रशासन ने मंदिर और वर्तमान संरक्षकों को आश्वस्त किया है कि इन पांडुलिपियों का स्वामित्व उन्हीं के पास रहेगा। सरकार केवल इनके ज्ञान को संरक्षित करने और शोधकर्ताओं के लिए सुलभ बनाने का काम करेगी।

विरासत बचाने की बड़ी मुहिम: प्रशासन की अपील

नवादा जिला प्रशासन ने इस खोज को एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए आम जनता से भी अपील की है। प्रशासन का कहना है कि यदि किसी ग्रामीण क्षेत्र, पुराने मठ, या निजी संग्रह में ऐसी कोई भी प्राचीन पांडुलिपि या ऐतिहासिक दस्तावेज उपलब्ध हैं, तो उनकी जानकारी साझा करें।

“हम अपनी गौरवशाली विरासत को डिजिटल रूप दे रहे हैं ताकि आने वाली पीढ़ियां जान सकें कि हमारे पूर्वजों के पास विज्ञान और चिकित्सा का कितना उन्नत ज्ञान था।” — प्रशासनिक अधिकारी

महत्वपूर्ण तथ्य एक नजर में:

विवरण जानकारी
स्थान श्री ठाकुर राधा रमण लाल जी मंदिर, चांदीपुर (नवादा)
मंदिर निर्माण वर्ष 1883
पांडुलिपियों की संख्या 18
मिशन का नाम ज्ञान भारतम मिशन (भारत सरकार)
तकनीक AI और डिजिटल संरक्षण

नवादा में हुई इस खोज ने इतिहासकारों और शोधकर्ताओं के बीच नई उत्सुकता पैदा कर दी है। उम्मीद की जा रही है कि डिजिटलाइजेशन पूरा होने के बाद ये पांडुलिपियां दुनिया भर के विद्वानों के लिए ऑनलाइन उपलब्ध होंगी।

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