जम्मू | रविवार, 19 अप्रैल 2026
जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के ईकोसिस्टम को ध्वस्त करने के लिए सुरक्षाबलों ने एक और निर्णायक प्रहार किया है। श्रीनगर के हवल (Hawal) इलाके में चलाए गए एक संयुक्त ऑपरेशन के दौरान सुरक्षाबलों ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के चार ‘अंडरग्राउंड वर्कर’ (OGW) को दबोच लिया है। पकड़े गए आरोपियों के पास से विस्फोटक और फर्जी पहचान पत्र बरामद हुए हैं, जो किसी बड़ी साजिश की ओर इशारा कर रहे हैं।
हवल में ‘सर्जिकल’ नाकाबंदी: ऐसे हत्थे चढ़े आरोपी
अधिकारियों से प्राप्त ताजा जानकारी के अनुसार, यह सफलता पुलिस, सीआरपीएफ और सेना की संयुक्त ‘क्विक एक्शन टीम’ (QAT) के तालमेल का परिणाम है।
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लोकेशन: श्रीनगर का हवल इलाका, तिब्बती स्कूल देविआंगन के समीप।
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समय: शुक्रवार रात करीब 8:45 बजे, जब खुफिया इनपुट के आधार पर विशेष नाका लगाया गया था।
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कार्रवाई: एक संदिग्ध वाहन को रुकने का इशारा किया गया, जिसकी तलाशी के दौरान उसमें सवार चार युवकों की गतिविधियां संदिग्ध पाई गईं।
बरामदगी: फर्जी आधार कार्ड ने बढ़ाई चिंता
तलाशी के दौरान आरोपियों के पास से जो सामग्री मिली है, उसने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। बरामद सामान की सूची इस प्रकार है:
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4 हैंड ग्रेनेड: जो भीड़भाड़ वाले इलाकों को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल किए जा सकते थे।
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4 फर्जी आधार कार्ड: इनका उपयोग सुरक्षाबलों को चकमा देने और होटलों या किराए के मकानों में पहचान छिपाने के लिए किया जा रहा था।
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धमकी भरे पोस्टर: लश्कर-ए-तैयबा के लेटरहेड पर छपे 4 पोस्टर, जिनका उद्देश्य स्थानीय जनता में दहशत फैलाना था।
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डिजिटल सबूत: 4 मोबाइल फोन, जिनमें सीमा पार बैठे हैंडलर्स के संपर्क होने का संदेह है।
UAPA के तहत कड़ी कार्रवाई
पुलिस ने इस मामले में नौहट्टा पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज की है। आरोपियों पर गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) की धारा 13, 18, 23 के साथ-साथ विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।
विशेष अपडेट: जांच में यह भी सामने आ रहा है कि ये OGW हाल ही में सीमा पार से सक्रिय लश्कर हैंडलर शबीर अहमद लोन के संपर्क में थे, जो वर्तमान में विदेशी धरती से डिजिटल माध्यमों के जरिए भर्ती मॉड्यूल चला रहा है।
आतंकवाद के विरुद्ध ‘जीरो टॉलरेंस’: नई रणनीति
जम्मू-कश्मीर में हाल के हफ्तों में सुरक्षा का स्तर काफी ऊंचा कर दिया गया है। इसी क्रम में आज (19 अप्रैल 2026) 108 पुलिस जवानों के एक विशेष दस्ते ने सेना की ‘टाइगर डिवीजन’ के साथ 12 दिवसीय कठिन काउंटर-इंसर्जेंसी (CI) ट्रेनिंग पूरी की है।
इस प्रशिक्षण के मुख्य बिंदु:
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ड्रोन तकनीक: संदिग्ध ड्रोनों की पहचान और उन्हें मार गिराने (Counter-Drone) का प्रशिक्षण।
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आधुनिक पेट्रोलिंग: जंगलों और शहरी इलाकों में घेराबंदी (Cordon and Search) के नए तरीके।
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इंटेलिजेंस शेयरिंग: सेना और पुलिस के बीच रियल-टाइम सूचना साझा करने का नया सिस्टम।
निष्कर्ष: कुलगाम और श्रीनगर में हालिया गिरफ्तारियां यह साबित करती हैं कि सुरक्षाबल अब केवल आतंकियों को ही नहीं, बल्कि उनके रसद (Logistics) और पहचान छिपाने वाले तंत्र (Fake ID Network) को भी जड़ से मिटाने में जुटे हैं।
Matribhumisamachar


