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पाकिस्तान ने चूड़ियां नहीं पहनी, उसके पास भी परमाणु बम है : फारूक अब्दुल्ला

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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जम्मू. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (पीओके) पर अपने दावे को कभी नहीं छोड़ेगा. उन्होंने ये भी कहा कि भारत को इस पर बल पूर्वक कब्जा नहीं करना पड़ेगा. इसको लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि पाकिस्तान ने चूड़ियां नहीं पहन रखी हैं और उनके पास भी परमाणु बम है.

एनसी अध्यक्ष ने कहा, “अगर रक्षा मंत्री ऐसा सोच रहे हैं तो आगे बढ़ें. हम रोकने वाले कौन होते हैं लेकिन याद रखें, उन्होंने (पाकिस्तान) भी चूड़ियां नहीं पहनी हैं. उनके पास भी परमाणु बम है और दुर्भाग्य से वो परमाणु बम हम पर गिरेगा.”

राजनाथ सिंह ने क्या कहा था?

एक इंटरव्यू में राजनाथ सिंह ने कहा कि जिस तरह से जम्मू-कश्मीर में शांति और विकास लौटा है, जल्द ही पीओके को भारत में विलय करने की मांग की जाएगी. उन्होंने कहा, “हमें पीओके को लेने के लिए बल का प्रयोग नहीं करना पड़ेगा क्योंकि लोग कहेंगे कि हमें भारत में विलय करना होगा. ऐसी मांगें अब आ रही हैं.” राजनाथ सिंह ने कहा कि पीओके भारत का क्षेत्र था, है और रहेगा.

जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनावों पर दोनों नेताओं ने क्या कहा?

राजनाथ सिंह ने यह भी दावा किया कि जम्मू-कश्मीर में जल्द ही चुनाव होंगे. हालांकि, उन्होंने कोई समयरेखा नहीं दी. केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि जल्द ही जम्मू-कश्मीर में AFSPA की जरूरत नहीं पड़ेगी. उन्होंने पाकिस्तान से सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देना बंद करने को भी कहा.

वहीं, फारूक अब्दुल्ला ने भविष्यवाणी की कि अमरनाथ यात्रा के बाद जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनावों की घोषणा की जाएगी. उन्होंने कहा, “मुख्य समस्या भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव है. दोनों देशों को एक-दूसरे से बात करनी चाहिए और मुद्दों को सुलझाना चाहिए.”

साभार : एबीपी न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।