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अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा समारोह प्रभु श्री राम का कार्यक्रम है : रवि किशन

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

लखनऊ. उत्तर प्रदेश (यूपी) के गोरखपुर से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसद रवि किशन ने साफ किया है कि अयोध्या के राम मंदिर से जुड़े निर्माण कार्य में केंद्र सरकार का एक पैसा नहीं लगा है. यह मंदिर आम लोगों के रुपयों से बन रहा है. गुरुवार (18 जनवरी, 2024) को ये बातें उन्होंने उन सियासी आरोपों को लेकर कहीं जिनमें कहा गया कि राम मंदिर का उद्घाटन समारोह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सियासी कार्यक्रम है और उसके पीछे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) व भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का हाथ है.

एक्टिंग की दुनिया से पॉलिटिक्स में आने वाले रवि किशन ने मंदिर निर्माण को लेकर होने वाली सियासी बयानबाजी की कड़ी आलोचना की. उन्होंने इस बाबत कहा कि विरोध करने वालों को होश में आने और सच से सामना करने की जरूरत है. उनके मुताबिक, पीएम मोदी ही वह व्यक्ति हैं जिन्होंने देश की राजनीति का पूरा चेहरा बदला है.

‘INDIA’ नेताओं का बिना नाम लिए कहीं ये बातें
राम मंदिर के समारोह में शामिल न होने वालों को लेकर भाजपा सांसद बोले- यह प्रभु राम का कार्यक्रम है. कोई नास्तिक स्वभाव का है. हमने सुना है कि कोई रो रहा है और कोई रात में पूजा भी कर रहा है और माफी भी मांग रहा है. ऐसा इसलिए क्योंकि इस तरह के लोगों को दिन में राजनीति करनी है. उन्हें डर है कि कहीं उनकी राजनीति न खत्म हो जाए. कोई बिलबिलाकर बिस्तर से गिर रहा है.

‘Lok Sabha Elections 2024 आते-आते सब हिंदू हो जाएंगे’ 
रवि किशन ने आगे दावा किया कि देखिएगा कि 22 जनवरी 2024 तक कितने लोग हिंदू बन जाएंगे और कितने गले में घंटी बांधकर घूमेंगे. सब चुनाव आते-आते हिंदू बन जाएंगे. ये सारी चीजें तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बीजेपी, आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद (विहिप), कारसेवकों, साधु-संतों, सारे आध्यात्मिक लोगों और सनातनी विचारधारा का एजेंडा थीं.

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खुद को बताया Ram की गिलहरी, बोले- हमारी क्या औकात…
‘अयोध्या के श्रीराम’ नाम के अपने गीत को लेकर वह बोले, “हम तो गिलहरी हैं. हमारी क्या औकात है…प्रभु राम के सेतु को बनाने के लिए जैसे गिलहरियां और वानर लग गए थे, हम भी उसी तरह की सेना हैं. छोटी सी एक आहूति और प्रस्तुति है.”

साभार : एबीपी न्यूज़

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।