लोड हो रहा है...

योगी आदित्यनाथ कैबिनेट मंत्रियों के साथ 1 फरवरी को करेंगे रामलला के दर्शन

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
2 Min Read

लखनऊ. अयोध्या स्थित नवनिर्मित राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अब उनके दर्शन की होड़ लगी है. इस बीच भारतीय जनता पार्टी ने मुख्यमंत्रियों और काबीना मंत्रियों के दर्शन का प्लान शेयर किया है. बताया गया कि 1 फरवरी को उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मय कैबिनेट रामलला के दर्शन करेंगे. वहीं 2 फरवरी को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पूरी कैबिनेट के साथ रामलला के दर्शन करेंगे.

बता दें अयोध्या में नवनिर्मित राम मंदिर में 22 जनवरी को प्राण-प्रतिष्ठा की गयी रामलला की मूर्ति को ‘बालक राम’ के नाम से जाना जाएगा. इस विग्रह का नाम ‘बालक राम’ इसलिए रखा गया है क्योंकि भगवान पांच वर्ष के बच्चे के रूप में खड़ी मुद्रा में स्थापित किए गए हैं. प्राण प्रतिष्ठा समारोह से जुड़े एक पुजारी अरुण दीक्षित ने बताया कि ‘‘भगवान राम की मूर्ति, जिसका अभिषेक 22 जनवरी को किया गया था, का नाम ‘बालक राम’ रखा गया है. भगवान राम की मूर्ति का नाम ‘बालक राम’ रखने का कारण यह है कि वह एक बच्चे की तरह दिखते हैं, जिनकी उम्र पांच साल है.”

‘पहली बार जब मैंने मूर्ति देखी, तो मैं ….’
उन्होंने कहा, ‘‘पहली बार जब मैंने मूर्ति देखी, तो मैं रोमांचित हो गया और मेरे आंखों से आंसू बहने लगे. उस समय मुझे जो अनुभूति हुई, उसे मैं बयां नहीं कर सकता.’’ लगभग 50-60 प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान करा चुके काशी के पुजारी दीक्षित ने कहा, ‘‘अब तक किए गए सभी प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठानों में से, यह मेरे लिए सबसे ‘अलौकिक ‘ और ‘सर्वोच्च’ है.’’ उन्‍होंने कहा कि उन्हें मूर्ति की पहली झलक 18 जनवरी को मिली थी. मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति में एक भव्य समारोह में की गई. इस मौके पर प्रधानमंत्री ने कहा कि यह एक नए युग के आगमन का प्रतीक है.

साभार : एबीपी न्यूज़

- Advertisement -

भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

https://www।amazon.in/dp/9392581181/

https://www।flipkart.com/bharat-1857-se-1957-itihas-par-ek-drishti/p/itmcae8defbfefaf?pid=9789392581182

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।