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जयपुर सीरियल ब्लास्ट केस के चार आरोपी दोषी करार

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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जयपुर. शहर में करीब 17 साल पहले हुए सीरियल बम ब्लास्ट के दौरान चांदपोल के रामचंद्र मंदिर के पास मिले जिंदा बम मामले में अदालत ने चार आतंकियों को दोषी ठहराया है। जयपुर बम ब्लास्ट मामलों की विशेष अदालत में जज रमेश कुमार जोशी जिंदा बम प्लांट करने के मामले में चारों आतंकियों को लेकर फैसला मंगलवार, 8 अप्रैल को सुनाएंगे। अदालत ने जिंदा बम केस में सैफुर्रहमान, मोहम्मद सैफ, मोहम्मद सरवर आजमी और शाहबाज अहमद को दोषी ठहराया है। इनमें शाहबाज को छोड़कर अन्य को सीरियल ब्लास्ट के मामले में फांसी की सजा सुनाई गई थी, लेकिन हाईकोर्ट ने इन्हें बरी कर दिया था। फांसी की सजा के मामले में राज्य सरकार की अपील सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है।

13 मई को 2008 को जयपुर में 8 सीरियल ब्लास्ट हुए थे, नौंवा बम चांदपोल बाजार के गेस्ट हाउस के पास मिला था। बम फटने के 15 मिनट पहले इसे डिफ्यूज कर दिया गया था। चारों आतंकियों को इंडियन पेनल कोड की 4 धाराओं, अनलॉफुल एक्टिविटी प्रिवेंशन एक्ट (यूएपीए) की दो, विस्फोटक पदार्थ कानून की 3 धाराओं में दोषी ठहराया गया है। इन धाराओं में अधिकतम आजीवन कारावास का प्रावधान है। एटीएस ने जिंदा बम मामले में इन सभी आरोपियों को 25 दिसंबर 2019 को जेल से गिरफ्तार कर लिया था। एटीएस ने जिंदा बम मामले में सप्लीमेंट्री चार्जशीट पेश की थी। इसमें एटीएस ने तीन नए गवाह शामिल किए थे। सुनवाई के दौरान एटीएस ने पत्रकार प्रशांत टंडन, पूर्व एडीजी अरविंद कुमार और साइकिल कसने वाले दिनेश महावर सहित कुल 112 गवाहों के बयान दर्ज करवाए थे।

आरोपियों ने कहा था- पुलिस तय नहीं कर पाई कि मंदिर के सामने साइकिल किसने रखी

आरोपियों की ओर से वकील मिन्हाजुल हक ने बताया- बचाव पक्ष की ओर से किसी भी गवाह के बयान दर्ज नहीं करवाए गए। उन्होंने कहा- इस मामले और पूर्व में ब्लास्ट के 8 मामलों के तथ्य समान हैं। इन्हीं समान तथ्यों के आधार पर हाईकोर्ट आरोपियों को बरी कर चुका है। इस मामले में भी अभियोजन पक्ष यह पता नहीं कर पाया कि मंदिर के सामने साइकिल किसने रखी थी।

दो आरोपी जमानत पर थे, दो जेल में

जिंदा बम मामले में जिन चार आरोपियों को दोषी ठहराया गया है, उनमें से दो आरोपी सैफुर्रहमान और मोहम्मद सैफ जयपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं। वहीं, मोहम्मद सरवर आजमी और आरोपी शाहबाज अहमद जमानत पर बाहर थे, जिनको कोर्ट के फैसले के बाद पुलिस ने कस्टडी में ले लिया।

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साभार : दैनिक भास्कर

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।