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चीन ने भारतीय नौसेना को दिया धन्यवाद, भारत ने बचाई 22 लोगों की जान

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

बीजिंग. चीन का जब भी नाम आता है तो सरहद पर तनातनी, लद्दाख का तनाव या फिर गलवान की झड़पें याद आती हैं. लेकिन इस बार कुछ अलग हुआ है. कुछ ऐसा, जो शायद पहले कभी नहीं देखा गया. चीन ने भारत की नेवी को ‘थैंक यू’ बोला है. जी हां, वही चीन जो ज्‍यादातर वक्त भारत की आलोचना करता है, अब उसकी तारीफ करता दिखा. वजह जानकर आपको भी गर्व होगा.

दरअसल, 9 जून को केरल के अजीखल तट से करीब 44 नॉटिकल मील दूर समंदर में MV Wan Hai 503 नाम का एक कंटेनर शिप अचानक धमाके के बाद आग की चपेट में आ गया. जहाज में 14 चीनी और 6 ताइवान के नागरिक सवार थे. आग इतनी जोरदार थी कि पूरा जहाज धुएं में घिर गया. जिस वक्त सबको लगा कि अब कुछ नहीं हो सकता, उस वक्त इंडियन नेवी और कोस्ट गार्ड ने एंट्री मारी.

इंडियन नेवी ने जो किया, वो तारीफ के काबिल है

जैसे ही खबर मिली, भारतीय नौसेना ने INS Surat को उस जगह रवाना किया और INS Garuda से एक डोर्नियर विमान भेजा. साथ ही कोस्ट गार्ड ने भी अपनी पूरी ताकत झोंक दी. एक साथ 5 बड़े जहाज और C-144 एयरक्राफ्ट मौके पर भेज दिए गए. इन सभी की मेहनत और फुर्ती से सभी 22 लोगों की जान बचा ली गई.

फिर चीन ने क्या कहा?

इसके बाद भारत में चीन के राजदूत यू जिंग ने खुद एक्स पर लिखा, इंडियन नेवी और मुंबई कोस्ट गार्ड का शुक्रिया… आपने हमारे लोगों की जान बचाई. अब ये सुनकर कई लोग चौंक सकते हैं क्योंकि आमतौर पर चीन भारत की सेनाओं की आलोचना करता रहता है लेकिन इस बार वो खुद खुलकर तारीफ करता दिखा.

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ये पहली बार है?

यह शायद पहली बार है जब चीन ने भारत की फौज को ऐसे पब्लिकली धन्यवाद कहा है. आमतौर पर दोनों देशों के बीच रिश्ते इतने सहज नहीं होते। लेकिन यह वाकया एक मिसाल बन गया है. इस घटना ने एक बात साफ कर दी क‍ि भारत सिर्फ ताकतवर ही नहीं, दिल से भी बड़ा है. देश कौन सा है, इससे फर्क नहीं पड़ता… इंसानियत पहले है. चाहे वो चीन हो, ताइवान हो या कोई और. यही सोच भारत को बाकी देशों से अलग बनाती है.

साभार : न्यूज18

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।