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मैंने भारत व पाकिस्तान के बीच नहीं कराया युद्धविराम : डोनाल्ड ट्रंप

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

वाशिंगटन. अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने पहली बार माना है कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर नहीं कराया। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने मध्यस्थता नहीं कराई। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान समस्या सुलझाने में मदद की। बता दें कि भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव को लेकर पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया था कि उन्होंने दोनों देशों के बीच सीजफायर करा दिया है, लेकिन अब वह खुद कह रहे हैं कि मैंनें सीजफायर नहीं कराया लेकिन मैं कहना चाहता हूं कि मैंने मदद जरूरी की। ट्रंप कई बार भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर कराने का क्रेडिट लेने की कोशिश कर चुके थे। जबकि भारत ने स्पष्ट कर दिया था कि पाकिस्तान के DGMO ने खुद फोन कर सीजफायर की गुजारिश की थी।

अपने ही बयान से पलटे ट्रंप

कतर के दोहा में एक कार्यक्रम के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, भारत-पाकिस्तान के बीच हालात बेहद तनावपूर्ण हो चुके थे। ड्रोन और मिसाइलों की भाषा में बात होने वाली थी इसीलिए मैंने दोनों देशों से बात कर माहौल शांत करवाया। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि मुझे उम्मीद है कि मेरे यहां से निकलने के बाद भी मैं यहीं सुनूंगा कि दोनों देश शांत हैं।

कैसे हुआ सीजफायर?

बीते 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तानी आतंकियों ने 26 निर्दोष लोगों को मार डाला था। भारत ने पहलगाम हमले के जवाब में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया था। इसके बाद से पाकिस्तान ने भारतके जम्मू-कश्मीर से लेकर गुजरात तक लगातार मिसाइल, ड्रोन और फाइटर जेट से हमला किया है। हालांकि, भारतीय सेना ने एयर डिफेंस की मदद से पाकिस्तान के सभी प्रयासों को विफल कर दिया है। इसके बाद भारत ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तानी वायुसेना के 11 एयरबेस, एयर डिफेंस सिस्टम, कमांड और कंट्रोल सेंटर और रडार स्थलों समेत कई प्रमुख पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों को तबाह कर दिया था। भारत के डर से पाकिस्तान घुटनों पर आ गया और शांति की अपील करने लगा जिसके बाद दोनों देशों के बीच 10 मई को सीजफायर हुआ।

साभार : इंडिया टीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।