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विंग कमांडर व्योमिका सिंह पर सपा नेता रामगोपाल यादव ने दिया विवादित बयान

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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लखनऊ. ऑपरेशन सिंदूर की आवाज बनीं देश की दो वीरांगनाओं कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह पर बोलते हुए राजनेता कितने असंवेदनशील हैं इसका एक और मामला सामने आया है. पहले मध्यप्रदेश के मंत्री विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी कर दी तो वहीं अब मुरादाबाद में समाजवादी पार्टी के बड़े नेता प्रोफेसर राम गोपाल यादव विंग कमांडर व्योमिका सिंह के लिए जातिसूचक शब्द बोल गए.

राम गोपाल यादव ने क्या कहा

दरअसल सपा नेता रामगोपाल यादव मुरादाबाद में एक राजनीतिक कार्यक्रम को मंच से संबोधित कर रहे थे. भारत पाकिस्तान के बीच सीज फायर को लेकर राम गोपाल यादव ने पहले ट्रंप पर हमला बोला तो वहीं ऑपरेशन सिंदूर की सफलता पर भाजपा की तिरंगा यात्रा को भी निशाने पर लिया. इसी दौरान वो मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार के मंत्री विजय शाह के कर्नल सोफिया कुरैशी पर दिये बयान का जिक्र कर रहे थे और व्योमिका सिंह का नाम भूल गए. किसी ने उन्हें पीछे से व्योमिका सिंह का नाम बताया तो वह अपने बयान का इंट्रो ठीक करते हुए विंग कमांडर व्योमिका सिंह पर जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर बैठे.

भाजपा के राज्यसभा सांसद बृजलाल ने रामगोपाल पर साधा निशाना

इधर लखनऊ में भाजपा के राज्यसभा सांसद और पूर्व डीजीपी ने सपा नेता राम गोपाल यादव के बयान को लेकर उन्हें निशाने पर लिया और रामगोपाल यादव से माफी की मांग की. इतना ही नहीं उन्होंने इस बयानबाजी पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से भी जवाब मांगा. राज्यसभा सांसद बृजलाल ने कहा”देश व्योमिका सिंह को बहादुर बेटी के रूप में जानता है, प्रोफेसर साहब ने रिसर्च करके उनकी जाति जान ली. कुछ तो बोलो, दलित विरोधी अखिलेश यादव जी. माफ़ी मांगो.”

साभार : जी न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।