कान्स । शुक्रवार, 15 मई 2026
फ्रांस के तटीय शहर कान्स में जब दुनिया भर के कैमरे नामी डिजाइनरों के गाउन और कीमती गहनों पर टिके थे, तभी भारतीय मूल की आरती खेतरपाल ने एक ऐसी मिसाल पेश की जिसने हर भारतीय का सिर गर्व से ऊँचा कर दिया। कान्स के रेड कार्पेट पर आरती केवल एक सेलेब्रिटी के तौर पर नहीं, बल्कि सनातन धर्म की प्रतिनिधि के रूप में उतरीं।
आरती का लुक: सिर्फ फैशन नहीं, एक संदेश
आरती ने अपने डेब्यू के लिए सुलक्षणा मोंगा द्वारा डिजाइन किया गया एक कस्टम-मेड पीला ‘वृंदावन’ थीम वाला लहंगा चुना। इस लहंगे पर हाथ से की गई पेंटिंग्स में वृंदावन के घाट, कुंज गलियां और भगवान कृष्ण की लीलाओं को उकेरा गया था।
उनके लुक की सबसे खास बातें:
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पवित्र श्रीमद्भगवद्गीता: आरती ने अपने हाथ में एक छोटी भगवद गीता थामी हुई थी, जिसने ग्लैमर के मंच को आध्यात्मिक बना दिया।
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मंत्र जाप की थैली: उन्होंने ‘नाम जप’ वाली पोटली भी साथ रखी थी, जो उनकी गहरी आस्था को दर्शाती है।
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तुलसी कंठी माला: गले में वैष्णव परंपरा का प्रतीक तुलसी की माला उनके पूरे सनातनी स्वरूप को पूर्ण कर रही थी।
कौन हैं आरती खेतरपाल? ग्लैमर से भक्ति तक का सफर
आरती खेतरपाल का ग्लैमर इंडस्ट्री से नाता पुराना है, लेकिन उनकी पहचान अब एक समर्पित भजन गायिका के रूप में अधिक है।
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करियर की शुरुआत: आरती को पहली बड़ी पहचान 2018 में मीका सिंह के सुपरहिट गाने ‘समा’ से मिली थी।
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अभिनय और शोज: उन्होंने ‘इनसाइड एज’, ‘रागिनी एमएमएस रिटर्न्स’, और ‘मुस्कुराहटें’ जैसे लोकप्रिय डिजिटल शोज में काम किया है।
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भक्ति का मार्ग: पिछले कुछ वर्षों में आरती ने खुद को पूरी तरह से कृष्ण भक्ति के लिए समर्पित कर दिया है। वह वृंदावन में रहती हैं और अब तक 3000 से अधिक भजन संध्याओं का हिस्सा बन चुकी हैं।
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पारिवारिक गौरव: आरती के पिता की फिल्म भी इस साल कान्स में प्रदर्शित हो रही है, जो उनके लिए एक भावुक क्षण है।
सोशल मीडिया पर तहलका: “आलिया से ज्यादा चर्चा आरती की”
जहाँ आलिया भट्ट (Alia Bhatt) को वैश्विक मंच पर उनके बेहतरीन फैशन सेंस के लिए सराहा जा रहा है, वहीं आरती खेतरपाल की चर्चा उनके ‘साहस’ और ‘संस्कृति’ के लिए हो रही है। सोशल मीडिया पर लोग उन्हें “वृंदावन की बेटी” कह रहे हैं।
आरती ने इंस्टाग्राम पर लिखा:
“कान्स के इतिहास में पहली बार, मैंने गर्वपूर्वक सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व किया। यह उन सभी के लिए है जो ईश्वर में विश्वास रखते हैं और उन गुरुओं के लिए जिन्होंने हमें जप करना सिखाया।”
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