लोड हो रहा है...

11 साल पुराने मामले में कांग्रेस के दो विधायकों को 1-1 साल की सजा

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

जयपुर. राजस्थान में कांग्रेस के लिए बुधवार को चिंताजनक खबर आई। इस दौरान राजधानी जयपुर की कोर्ट ने कांग्रेस के दो मौजूदा विधायकों को 11 साल पुराने मामले में सजा सुनाई है। इस दौरान जयपुर महानगर प्रथम की ACJM- 19 कोर्ट ने लाडनूं विधायक मुकेश भाकर और शाहपुरा विधायक मनीष यादव को 1-1 साल की सजा सुनाई है। कोर्ट ने इस मामले में नौ लोगों को भी दोषी माना है, इन्हें भी कोर्ट ने सजा सुनाई। दोनों विधायकों के खिलाफ आम रास्ते पर जाम लगाने और भीड़ जमा करने का आरोप था।

कोर्ट ने इसलिए दोनों विधायकों को सुनाई सजा

जयपुर की महानगर ACJM कोर्ट -19 ने बुधवार को 11 साल पुराने मामले की सुनवाई की। यह मामला रास्ता जाम करने और भीड़ जमा करने के मामले से जुड़ा हुआ है। वर्ष 2013 में राजस्थान यूनिवर्सिटी के मुख्य द्वार के बाहर दोनों विधायकों ने छात्र राजनीति में रहते हुए प्रदर्शन किया। उनके साथ छात्रों ने JLN मार्ग को जाम किया। इससे आवागमन बाधित हो गया। बाद में विधायक मुकेश भाकर, मनीष यादव समेत छात्र नेताओं के खिलाफ धारा 143, 341 के तहत मामला दर्ज किया गया।

कोर्ट ने मामले में नौ लोगों को भी दोषी माना

वर्ष 2013 में मुकेश भाकर और मनीष यादव समर्थकों ने राजस्थान यूनिवर्सिटी के बाहर जमकर बवाल किया। इस दौरान उनकी पुलिस के साथ भी काफी तनातनी हुई। छात्रों ने JLN मार्ग पर जाम लगा दिया।।इससे वहां यातायात की स्थिति बिगड़ गई। पुलिस ने इस मामले में चालान पेश किया, जहां सुनवाई के दौरान पुलिस ने दोनों विधायकों के साथ 9 लोगों को भी दोषी माना है। इनमें झोटवाड़ा से कांग्रेस के प्रत्याशी रह चुके अभिषेक चौधरी भी शामिल है। इन सभी को भी जुर्माना लगाते हुए एक-एक साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई है।

साभार : नवभारत टाइम्स

- Advertisement -

भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

सारांश कनौजिया की पुस्तकें

ऑडियो बुक : भारत 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि)

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।