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समान नागरिक संहिता लागू करने वाला पहला राज्य बना उत्तराखंड

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

देहरादून. उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता यानी UCC आज सोमवार से लागू हो गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Dhami) ने ऑफिशल पोर्टल लॉन्च करते हुए ऐलान कर दिया। यूसीसी (Uniform Civil Code) लागू करने वाला उत्तराखंड अब भारत देश का पहला राज्य बन गया है। 27 जनवरी को यूसीसी लागू किए जाने की तारीख पहले से तय की गई थी। पुष्कर सिंह धामी ने UCC का पोर्टल लॉन्च करते हुए कहा, ‘आज का दिन उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए ऐतिहासिक है। ड्राफ्ट बनाने में टीम ने कड़ी मेहनत की है। हमने जनता से किया वादा पूरा किया है। यूसीसी किसी धर्म के खिलाफ नहीं है, बल्कि इससे अब राज्य में सभी धर्मों की महिलाओं को एक समान अधिकार मिलेगा। यूसीसी से महिलाएं सशक्त होंगी। हलाला प्रथा, बहुविवाह, बाल विवाह पर रोक लगेगी।’

सीएम धामी ने यूसीसी लागू करते हुए कहा कि इस कानून से समाज में एकरूपता आएगी और सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और दायित्व तय होंगे। समान नागरिक संहिता के अंतर्गत जाति, धर्म, लिंग आदि के आधार पर भेद करने वाले व्यक्तिगत नागरिक मामलों से संबंधित सभी कानूनों में एकरूपता लाने की कोशिशि की गई है। भाजपा ने 2022 के विधानसभा चुनाव में उत्तराखंड में यूसीसी को लागू करने को प्रमुख चुनावी वादे में रखा था। सीएम की कुर्सी पर दोबारा बैठते ही पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में कैबिनेट की पहली ही बैठक में यूसीसी प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए उसका मसौदा तैयार करने के लिए विशेषज्ञ कमिटी के गठन पर मुहर लगा दी गई थी। उत्तराखंड यूसीसी विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, लिव-इन रिलेशनशिप और इनसे संबंधित अन्य विषयों को रेगुलेट करेगा। यूसीसी में सभी धर्मों में पुरुषों और महिलाओं के लिए समान शादी की उम्र, तलाक के आधार और प्रक्रियाएं तय की गईं हैं, जबकि बहुविवाह और हलाला पर बैन लगाया गया है।

सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जज रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में 27 मई 2022 को विशेषज्ञ समिति गठित की गई थी, जिसने लगभग डेढ़ वर्ष में कई वर्गों से बातचीत के आधार पर चार भाग में तैयार अपनी रिपोर्ट 2 फरवरी 2024 को राज्य सरकार को सौंपी। रिपोर्ट के आधार पर 7 फरवरी 2024 को विधानसभा के विशेष सत्र में यूसीसी विधेयक पास हुआ और उसके एक महीने बाद 12 मार्च 2024 को राष्ट्रपति ने भी उसे अपनी मंजूरी दे दी।

साभार : नवभारत टाइम्स

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।