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संभल: कब्रिस्तान की जमीन पर बनी मस्जिद ‘अवैध’ घोषित, तहसीलदार कोर्ट ने दिया बेदखली का आदेश

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

लखनऊ | शनिवार, 2 मई 2026

उत्तर प्रदेश के संभल जनपद में प्रशासन ने सरकारी और सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। तहसील संभल के नखासा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव कसेरुआ में एक विवादित मस्जिद के निर्माण को तहसीलदार न्यायालय ने अवैध घोषित कर दिया है।

शुक्रवार को तहसीलदार धीरेंद्र कुमार सिंह ने राजस्व टीम के साथ गांव का दौरा किया और विवादित भूखंड की पैमाइश की। अधिकारियों के अनुसार, राजस्व अभिलेखों (सरकारी खतौनी) में संबंधित जमीन ‘कब्रिस्तान’ और ‘ग्राम समाज’ के नाम पर दर्ज है। मौके पर की गई जांच में पाया गया कि इसी सुरक्षित भूमि पर मस्जिद का निर्माण किया गया है।

न्यायालय का फैसला और साक्ष्यों का अभाव

यह मामला तब प्रकाश में आया जब गांव के ही कुछ लोगों ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर कब्रिस्तान की भूमि को सुरक्षित करने की मांग की थी। तहसीलदार धीरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि सुनवाई के दौरान मस्जिद कमेटी को अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिया गया था। हालांकि, कमेटी की ओर से ऐसा कोई भी पुख्ता साक्ष्य या दस्तावेज पेश नहीं किया गया जिससे यह साबित हो सके कि मस्जिद का निर्माण किसी निजी या बैनामा शुदा जमीन पर हुआ है।

परिणामस्वरूप, न्यायालय ने बेदखली (Eviction) के आदेश पारित कर दिए। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यदि मस्जिद कमेटी स्वयं निर्माण नहीं हटाती है, तो उन पर भारी हर्जाना लगाया जाएगा और प्रशासन बलपूर्वक अतिक्रमण हटाएगा।

अगली कार्रवाई: DM कोर्ट में अपील

तहसीलदार के इस सख्त फैसले के तुरंत बाद मस्जिद कमेटी ने जिलाधिकारी (DM) न्यायालय में अपील दायर की है। तहसीलदार ने मीडिया को जानकारी दी कि वर्तमान में मामला अपीलीय न्यायालय के विचाराधीन है, अतः आगे की कोई भी भौतिक कार्रवाई (जैसे ध्वस्तीकरण) उच्च न्यायालय के निर्णय के बाद ही की जाएगी।

इसके साथ ही, गांव में अन्य सरकारी भूमि पर हुए अवैध निर्माणों को लेकर भी प्रशासन ने लोगों को नोटिस जारी कर दिए हैं।

मुख्य हाइलाइट्स:

  • कसेरुआ गांव में सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण का मामला।

  • तहसीलदार न्यायालय ने मस्जिद निर्माण को अवैध पाया।

  • मस्जिद कमेटी ने जिलाधिकारी न्यायालय में अपील दायर की।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।