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पश्चिम बंगाल चुनाव: मतगणना नियमों पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, TMC की याचिका खारिज

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

कोलकाता | शनिवार, 2 मई 2026  

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों से ठीक पहले कानूनी लड़ाई में तृणमूल कांग्रेस (TMC) को देश की सर्वोच्च अदालत से निराशा हाथ लगी है। सुप्रीम कोर्ट की एक विशेष पीठ ने शनिवार को उस याचिका पर सुनवाई की, जिसमें भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा मतगणना पर्यवेक्षकों के रूप में केवल केंद्रीय कर्मचारियों की नियुक्ति को चुनौती दी गई थी।

सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख

न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची की विशेष पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग के पास निष्पक्ष चुनाव और मतगणना सुनिश्चित करने के लिए कर्मियों का चयन करने का पूर्ण विशेषाधिकार है।

अदालत ने कहा:

“कानून की दृष्टि में राज्य सरकार और केंद्र सरकार के कर्मचारी समान हैं। चुनाव आयोग पारदर्शिता बनाए रखने के लिए किसी भी सरकारी सेवक को जिम्मेदारी सौंप सकता है।”

क्या था विवाद?

TMC ने कलकत्ता हाई कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिसने मतगणना में केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) और केंद्र सरकार के कर्मचारियों को प्राथमिकता देने के ECI के सर्कुलर को सही माना था।

  • TMC की दलील: वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पार्टी की ओर से तर्क दिया कि चुनाव आयोग ने राज्य के कर्मचारियों पर अविश्वास जताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि माइक्रो-ऑब्जर्वर्स के रूप में पहले से ही केंद्रीय कर्मचारी मौजूद हैं, ऐसे में सुपरवाइजर भी केंद्र के होने से राज्य की भूमिका खत्म हो जाएगी।

  • चुनाव आयोग का पक्ष: आयोग ने दलील दी कि 13 अप्रैल 2026 के सर्कुलर का पालन निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए किया जा रहा है और रैंडम सिलेक्शन (यादृच्छिक चयन) के जरिए ही नियुक्तियां की गई हैं।

तथ्य

मीडिया रिपोर्ट्स और राजनीतिक गलियारों में चल रही भ्रांतियों के बीच यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि:

  1. कोई नया नियम नहीं: मतगणना में केंद्रीय कर्मचारियों का उपयोग कोई नया नियम नहीं है, बल्कि चुनाव आयोग के पास उपलब्ध शक्तियों का विस्तार है।

  2. राज्य कर्मचारियों की भूमिका: अदालत ने स्पष्ट किया कि सर्कुलर का मतलब राज्य कर्मचारियों को पूरी तरह बाहर करना नहीं है, बल्कि प्रत्येक टेबल पर कम से कम एक केंद्रीय कर्मचारी की मौजूदगी सुनिश्चित करना है।

निष्कर्ष

4 मई 2026 को होने वाली मतगणना के लिए अब रास्ता साफ हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद राज्य में राजनीतिक पारा और चढ़ने की उम्मीद है, क्योंकि विपक्ष इसे पारदर्शिता की जीत बता रहा है, वहीं सत्ताधारी दल इसे राज्य के संघीय ढांचे पर चोट मान रहा है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।