बीजिंग. तकनीक और प्रगति की दौड़ में दुनिया का नेतृत्व करने वाले देश चीन से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने मानवता को झकझोर कर रख दिया है। एक कथित ‘सुपरस्टिशन किलिंग’ (अंधविश्वास के कारण हत्या) के मामले ने न केवल चीन के ग्रामीण समाज की परतों को उघाड़ दिया है, बल्कि पूरी दुनिया में बहस छेड़ दी है।
घटना का विवरण: ‘बदला’ लेने के नाम पर बलि
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला चीन के एक दूरदराज के प्रांत का है, जहाँ एक परिवार ने अपने ही सदस्य की केवल इसलिए जान ले ली क्योंकि उन्हें शक था कि वह किसी ‘बुरी आत्मा’ के साये में है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार:
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अजीबोगरीब अनुष्ठान: परिवार के सदस्यों ने कथित तौर पर एक स्थानीय ‘झाड़-फूंक’ करने वाले के कहने पर पीड़ित को घंटों तक प्रताड़ित किया।
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शुद्धिकरण का दावा: हत्यारों का मानना था कि वे पीड़ित को मार नहीं रहे हैं, बल्कि उसके शरीर से ‘शतानी ताकतों’ को बाहर निकालने के लिए एक शुद्धिकरण प्रक्रिया अपना रहे हैं।
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पड़ोसियों की गवाही: पड़ोसियों ने बताया कि घर से चीखने-चिल्लाने की आवाजें आ रही थीं, लेकिन किसी ने हस्तक्षेप नहीं किया क्योंकि उन्हें लगा कि यह कोई धार्मिक अनुष्ठान चल रहा है।
पुलिस की कार्रवाई और खुलासे
स्थानीय पुलिस ने मौके पर पहुँचकर शव को कब्जे में लिया और मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। जांच में जो बातें सामने आईं, वे और भी चौंकाने वाली हैं:
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आरोपी पिछले कई हफ्तों से एक गुप्त कल्ट (पंथ) के संपर्क में थे।
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इंटरनेट और सोशल मीडिया के जरिए इस तरह के कट्टरपंथी अंधविश्वासों को हवा दी जा रही थी।
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पीड़ित को लंबे समय तक भूखा रखा गया और अंत में एक हिंसक ‘अनुष्ठान’ के दौरान उसकी मौत हो गई।
क्या कहता है समाजशास्त्रियों का नजरिया?
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन में तेजी से होते शहरीकरण और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता की कमी के कारण लोग अक्सर अंधविश्वास का सहारा लेते हैं। जब चिकित्सा विज्ञान उनकी समस्याओं का समाधान नहीं कर पाता, तो वे सदियों पुराने भ्रामक प्रथाओं की ओर मुड़ जाते हैं।
“यह घटना केवल एक अपराध नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज में छिपी मानसिक रुग्णता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण की कमी का परिणाम है।” — स्थानीय समाजशास्त्री
वैश्विक स्तर पर प्रतिक्रिया
इस मामले के सामने आने के बाद मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने चीन में चल रहे ‘गुप्त पंथों’ (Underground Cults) पर चिंता जताई है। सोशल मीडिया पर लोग मांग कर रहे हैं कि अंधविश्वास को बढ़ावा देने वाले ऐसे तत्वों के खिलाफ सख्त कानून बनाए जाएं।
अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया की स्थिति
अंधविश्वास से जुड़ी हत्याओं का सबसे बड़ा संकट अफ्रीकी देशों (जैसे तंजानिया और मलावी) में देखा जाता है:
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एल्बिनिज्म (Albino) हत्याएं: तंजानिया में एक भयानक अंधविश्वास है कि एल्बिनो लोगों (सफेद त्वचा वाले) के अंगों से बना ताबीज धन लाता है। इसके खिलाफ वहां की सरकार ने अब स्पेशल टास्क फोर्स बनाई है और कई दोषियों को फांसी की सजा दी गई है।
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पापुआ न्यू गिनी: यहाँ ‘सोरसेरी’ (Sorcery) यानी जादू-टोने के नाम पर हिंसा इतनी बढ़ गई थी कि सरकार को 2013 में ‘सोरसेरी किलिंग’ के लिए विशेष रूप से मृत्युदंड का कानून बहाल करना पड़ा।
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