बुधवार, मई 06 2026 | 11:22:55 PM
Breaking News
Home / अंतर्राष्ट्रीय / UK में ‘ब्लैक माम्बा’ का आतंक: इंसान को ‘ज़ॉम्बी’ बना देने वाला जानलेवा नशा

UK में ‘ब्लैक माम्बा’ का आतंक: इंसान को ‘ज़ॉम्बी’ बना देने वाला जानलेवा नशा

Follow us on:

लंदन. ब्रिटेन (UK) में ‘ब्लैक माम्बा’ (Black Mamba) नाम की एक खतरनाक सिंथेटिक ड्रग ने कोहराम मचा रखा है। सड़कों पर इस नशे की चपेट में आए लोगों की हालत देख किसी की भी रूह कांप सकती है। इसे ‘ज़ॉम्बी ड्रग’ इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि इसे लेने के बाद इंसान की सोचने-समझने और चलने-फिरने की शक्ति खत्म हो जाती है और वह एक ‘ज़िंदा लाश’ की तरह नजर आने लगता है।

क्या है ‘ब्लैक माम्बा’ और यह कैसे काम करती है?

ब्लैक माम्बा एक प्रकार का सिंथेटिक कैनबिनोइड (Synthetic Cannabinoid) है। इसे अक्सर ‘नकली गांजा’ कहकर बेचा जाता है, लेकिन यह प्राकृतिक गांजे से कई गुना ज्यादा शक्तिशाली और घातक है। इसे प्रयोगशाला में रसायनों को सुखी पत्तियों या जड़ी-बूटियों पर छिड़क कर तैयार किया जाता है।

  • बनावट: यह दिखने में सामान्य जड़ी-बूटियों जैसा लगता है, लेकिन इसमें मौजूद रसायन सीधे मस्तिष्क के उन हिस्सों पर हमला करते हैं जो शरीर के संतुलन और चेतना को नियंत्रित करते हैं।

  • कीमत: यह ड्रग बहुत सस्ती है, जिसके कारण यह ब्रिटेन के बेघर लोगों, युवाओं और कैदियों के बीच तेजी से फैल रही है।

यूज़र्स पर असर: ‘ज़ॉम्बी’ जैसा खौफनाक मंजर

सोशल मीडिया और समाचारों में सामने आए वीडियो में देखा जा सकता है कि इस ड्रग को लेने के कुछ ही सेकंड के भीतर यूज़र्स ‘काउच लॉक’ (Couch Lock) की स्थिति में चले जाते हैं।

  1. शारीरिक जड़ता: नशा करने वाला व्यक्ति जहाँ होता है, वहीं पत्थर की तरह जम जाता है। कई लोग घंटों तक अजीबोगरीब मुद्रा में सड़कों पर खड़े या झुके रहते हैं।

  2. होश खो देना: यूज़र्स पूरी तरह से अर्ध-चेतन (Semi-conscious) अवस्था में चले जाते हैं। वे न तो बोल पाते हैं और न ही किसी को पहचान पाते हैं।

  3. भयानक व्यवहार: कुछ मामलों में यूज़र्स अत्यधिक हिंसक हो जाते हैं या उन्हें डरावने मतिभ्रम (Hallucinations) होने लगते हैं। ब्रिटेन में एक मामला ऐसा भी आया था जहाँ ड्रग के असर में एक व्यक्ति ने अपना ही अंग काट लिया था।

स्वास्थ्य पर गंभीर खतरे

यह ड्रग न केवल मस्तिष्क बल्कि पूरे शरीर के अंगों को नुकसान पहुँचाती है:

  • हृदय और फेफड़े: इसके सेवन से दिल की धड़कन तेज होना और सांस लेने में भारी तकलीफ हो सकती है।

  • किडनी फेलियर: रसायनों की भारी मात्रा के कारण किडनी खराब होने का खतरा रहता है।

  • दौरे पड़ना: यूज़र्स को अक्सर मिर्गी जैसे दौरे पड़ते हैं और मुँह से झाग निकलने लगता है।

ब्रिटेन सरकार का कदम

ब्रिटेन में इसे ‘क्लास बी’ (Class B) ड्रग की श्रेणी में रखा गया है और ‘साइकोएक्टिव सब्सटेंस एक्ट 2016’ के तहत इसे बेचना या रखना पूरी तरह गैरकानूनी है। बावजूद इसके, ब्लैक मार्केट में इसकी बिक्री ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है।

चेतावनी: ब्लैक माम्बा कोई साधारण नशा नहीं बल्कि एक जहर है। इसका एक कश भी जानलेवा साबित हो सकता है या इंसान को जीवनभर के लिए मानसिक रूप से अपाहिज बना सकता है।

ब्लैक माम्बा के घातक दुष्प्रभाव (Deep Dive into Health Risks)

यह ड्रग प्राकृतिक नहीं है, इसलिए शरीर इसके रसायनों को प्रोसेस नहीं कर पाता। इसके परिणाम स्वरूप शरीर में निम्नलिखित समस्याएं उत्पन्न होती हैं:

मस्तिष्क पर असर (Neurological Impact)

  • साइकोसिस (Psychosis): लंबे समय तक इस्तेमाल से व्यक्ति पूरी तरह पागलपन का शिकार हो सकता है। उसे ऐसी आवाजें सुनाई देती हैं या चीजें दिखाई देती हैं जो वास्तव में नहीं हैं।

  • याददाश्त का खत्म होना: यह मस्तिष्क के ‘हिप्पोकैम्पस’ हिस्से को स्थायी रूप से नुकसान पहुँचा सकता है, जिससे सोचने और याद रखने की क्षमता खत्म हो जाती है।

शारीरिक अंगों की विफलता (Organ Failure)

  • अचानक दिल का दौरा: इसके रसायन रक्तचाप (Blood Pressure) को इतनी तेजी से बढ़ाते हैं कि कम उम्र के युवाओं को भी कार्डियक अरेस्ट आ जाता है।

  • श्वसन पक्षाघात (Respiratory Paralysis): अक्सर यूज़र्स बेहोशी की हालत में अपनी ही उल्टी (Vomit) के कारण दम तोड़ देते हैं क्योंकि उनका शरीर प्रतिक्रिया देने में असमर्थ होता है।

कानूनी पहलू और चुनौतियाँ (Legal Context and Challenges)

ब्रिटेन में ब्लैक माम्बा से निपटना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।

कानून: साइकोएक्टिव सब्सटेंस एक्ट 2016

ब्रिटेन सरकार ने इस ड्रग की गंभीरता को देखते हुए सख्त कानून बनाए हैं:

  • सजा: इस ड्रग की सप्लाई, उत्पादन या आयात करने पर 7 साल तक की जेल और भारी जुर्माना हो सकता है।

  • जेलों में प्रतिबंध: ब्रिटेन की जेलों में यह एक बड़ी समस्या है। वहां कागजों या कपड़ों पर इस ड्रग को छिड़क कर तस्करी की जाती है, जिसे पकड़ना बहुत मुश्किल होता है।

कानूनी पेंच: ‘केमिकल कोडिंग’ का खेल

ड्रग निर्माता कानून से बचने के लिए एक चालाकी करते हैं। जैसे ही सरकार एक खास रासायनिक फॉर्मूले (Chemical Formula) को प्रतिबंधित करती है, लैब में बैठे अपराधी उसके मॉलिक्यूल में थोड़ा सा बदलाव कर देते हैं।

  • इससे वह तकनीकी रूप से एक नई ड्रग बन जाती है जो पुरानी प्रतिबंधित सूची में नहीं होती।

  • पुलिस और लैब को इस नए फॉर्मूले को पहचानने और फिर से प्रतिबंधित करने में महीनों लग जाते हैं।

समाज पर प्रभाव: बेघर और युवा आबादी

ब्रिटेन के बड़े शहरों (जैसे बर्मिंघम और मैनचेस्टर) में बेघर लोगों के बीच यह ड्रग ‘महामारी’ की तरह फैली है।

  • यह सामान्य सिगरेट से भी सस्ती मिलती है।

  • इसका नशा बहुत छोटा (लगभग 15-30 मिनट) होता है, जिसके कारण यूज़र्स बार-बार इसे लेते हैं, जिससे वे बहुत जल्दी इसके शारीरिक और मानसिक गुलाम बन जाते हैं।

मित्रों,
मातृभूमि समाचार का उद्देश्य मीडिया जगत का ऐसा उपकरण बनाना है, जिसके माध्यम से हम व्यवसायिक मीडिया जगत और पत्रकारिता के सिद्धांतों में समन्वय स्थापित कर सकें। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए हमें आपका सहयोग चाहिए है। कृपया इस हेतु हमें दान देकर सहयोग प्रदान करने की कृपा करें। हमें दान करने के लिए निम्न लिंक पर क्लिक करें -- Click Here


* 1 माह के लिए Rs 1000.00 / 1 वर्ष के लिए Rs 10,000.00

Contact us

Check Also

युद्ध की आग में झुलसता ईरान: क्या यह अंत की शुरुआत है?

तेहरान । सोमवार, 4 मई 2026 तेहरान से आ रही खबरें दिल दहला देने वाली …