जम्मू | बुधवार, 1 जुलाई 2026
वार्षिक श्री अमरनाथ यात्रा 2026 को सुरक्षित, सुगम और निर्बाध बनाने के लिए सुरक्षा एजेंसियों ने अपनी कमर कस ली है। इस वर्ष महिला श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सम्मान और सहायता को सर्वोपरि रखते हुए एक बेहतरीन पहल की गई है। पहलगाम के पारंपरिक मार्ग पर स्थित प्रमुख नुनवान आधार शिविर में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की महिला जवानों की एक विशेष टुकड़ी को तैनात किया गया है। यह टुकड़ी यात्रा के लिए तैयार किए गए बहुस्तरीय सुरक्षा ढांचे का एक बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण हिस्सा है।
महिला जवान सुरक्षा जांच चौकियों पर महिला श्रद्धालुओं की सघन तलाशी लेने, लंबी कतारों का सुव्यवस्थित संचालन सुनिश्चित करने, बुजुर्ग एवं दिव्यांग महिलाओं की मदद करने तथा पवित्र गुफा की ओर रवाना होने से पहले हर मोर्चे पर निर्बाध आवाजाही बनाए रखने का दायित्व मुस्तैदी से निभा रही हैं।
सुरक्षा के साथ सम्मान: CRPF की राष्ट्रीय विविधता की झलक
नुनवान शिविर में तैनात इस विशेष टीम में भारत के विभिन्न राज्यों से आई महिला जवान शामिल हैं, जो सीआरपीएफ की राष्ट्रीय विविधता और महिला सुरक्षा के प्रति उसकी अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। इन जांबाज जवानों में शामिल हैं:
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उत्तर प्रदेश से मुस्कान त्यागी (जिन्होंने वर्ष 2023 में सीआरपीएफ ज्वाइन की और पहली बार अमरनाथ ड्यूटी संभाल रही हैं) एवं आरती सिंह।
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आंध्र प्रदेश से संध्या रानी।
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नागालैंड से किरोन।
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पश्चिम बंगाल से सोमाश्री।
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राजस्थान से आशा बाई मीणा।
सुरक्षा जांच के अलावा यह टीम पहली बार यात्रा पर आए श्रद्धालुओं और वरिष्ठ नागरिकों को यात्रा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां और हरसंभव सहायता भी उपलब्ध करा रही है। महिला श्रद्धालुओं ने प्रशासन के इस कदम का तहे दिल से स्वागत किया है, क्योंकि इससे सुरक्षा जांच की पूरी प्रक्रिया बेहद सहज, सम्मानजनक और सुविधाजनक हो गई है।
त्रुटि सुधार और यात्रा 2026 की सही समय-सीमा
इंटरनेट पर कुछ अनधिकृत वेबसाइटों और ट्रेवल पोर्टल्स पर अमरनाथ यात्रा 2026 की अवधि को लेकर भ्रामक जानकारियां (जैसे 62 दिन की अवधि या गलत तारीखें) प्रसारित हो रही हैं। आधिकारिक स्रोतों के अनुसार सही और सटीक जानकारी निम्नलिखित है:
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कुल अवधि: यह वार्षिक यात्रा कुल 57 दिवसीय होगी।
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प्रारंभ तिथि: यात्रा आधिकारिक तौर पर 3 जुलाई 2026 से शुरू होगी।
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समापन तिथि: यह यात्रा रक्षाबंधन के पावन पर्व यानी 28 अगस्त 2026 को पवित्र गुफा में छड़ी मुबारक के पहुंचने के साथ संपन्न होगी।
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प्रथम पूजा: इस सीजन की औपचारिक शुरुआत 29 जून 2026 (ज्येष्ठ पूर्णिमा) को आयोजित प्रथम पूजा से हो चुकी है।
श्रद्धालु अनंतनाग जिले के पारंपरिक पहलगाम मार्ग (48 किमी) और गांदरबल जिले के छोटे लेकिन कठिन बालटाल मार्ग (14 किमी) से हिमालय स्थित पवित्र गुफा के दर्शन के लिए प्रस्थान कर सकते हैं।
नुनवान शिविर पर कड़ा सुरक्षा पहरा और अत्याधुनिक निगरानी
इस वर्ष यात्रा के दौरान हजारों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए नुनवान आधार शिविर और उसके आसपास सुरक्षा तथा भीड़ प्रबंधन के बेहद व्यापक इंतजाम किए गए हैं। सीआरपीएफ ने जम्मू-कश्मीर पुलिस, भारतीय सेना तथा अन्य केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर दोनों रूटों पर एक अभेद्य बहुस्तरीय सुरक्षा घेरा (Multi-Tiered Security Grid) तैयार किया है।
इस सुरक्षा ढांचे के अंतर्गत निम्नलिखित अत्याधुनिक व्यवस्थाएं की गई हैं:
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सघन चौकसी: रोड ओपनिंग पार्टियां (ROP), रात्रिकालीन गश्त और क्विक रिएक्शन टीमें (QRT) हर संदिग्ध हलचल पर नजर रख रही हैं।
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एंटी-सैबोटाज जांच: बम निरोधक एवं निस्तारण दस्ते (BDDS) और खोजी कुत्तों के विशेष डॉग स्क्वाड द्वारा पूरे क्षेत्र को नियमित रूप से सैनिटाइज किया जा रहा है।
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हाई-टेक सर्विलांस: शिविर में अत्याधुनिक निगरानी उपकरण, अतिरिक्त सुरक्षा चौकियां और ड्रोन मैपिंग के साथ इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस प्रणाली को चौबीसों घंटे सक्रिय रखा गया है।
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प्रवेश नियंत्रण: शिविर में प्रवेश करने वाले प्रत्येक व्यक्ति और वाहन की आरएफआईडी (RFID) ट्रैकिंग और सघन स्कैनिंग की जा रही है।
श्रद्धालुओं के लिए अनिवार्य गाइडलाइंस (Important Rules for Yatris)
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आरएफआईडी कार्ड (RFID Card): श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड (SASB) के नियमों के अनुसार, हर पंजीकृत यात्री को जम्मू या कश्मीर संभाग के नामित काउंटरों से अपना आरएफआईडी कार्ड प्राप्त करना अनिवार्य है। इसके बिना यात्रा मार्ग पर प्रवेश नहीं मिलेगा।
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अनिवार्य स्वास्थ्य प्रमाण पत्र (CHC): उच्च ऊंचाई वाले इस दुर्गम ट्रैक पर जाने के लिए अधिकृत डॉक्टरों द्वारा 8 अप्रैल 2026 को या उसके बाद जारी किया गया ‘कम्पल्सरी हेल्थ सर्टिफिकेट’ होना अनिवार्य है।
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आयु सीमा: यात्रा के लिए 13 वर्ष से कम और 70 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों को अनुमति नहीं है। साथ ही 6 सप्ताह से अधिक की गर्भवती महिलाओं की यात्रा पर भी प्रतिबंध है।
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