जयपुर. राजस्थान के बूंदी जिले में कथित धार्मिक धर्मांतरण की कोशिशों को लेकर तनाव का माहौल बना हुआ है। हाल ही में क्रिसमस के दौरान और उसके बाद, हिंदू संगठनों ने स्थानीय चर्च और कुछ संदिग्ध गतिविधियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
प्रमुख घटनाक्रम: चर्च पर हंगामा और विरोध प्रदर्शन
बीते दिसंबर के अंतिम सप्ताह में बूंदी के चित्तौड़ रोड स्थित एक चर्च में कथित रूप से प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराने की सूचना पर हिंदू संगठनों (vishwa Hindu Parishad और Bajrang Dal) ने भारी हंगामा किया। संगठनों का आरोप है कि वहां गरीब तबके के लोगों और महिलाओं को बहला-फुसलाकर धर्म परिवर्तन के लिए उकसाया जा रहा था।
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पुलिस की कार्रवाई: सूचना मिलते ही पुलिस बल मौके पर पहुंचा और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने फिलहाल मामले में कुछ लोगों से पूछताछ की है और चर्च की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
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गोठड़ा कस्बे का मामला: इससे पहले बूंदी के गोठड़ा कस्बे में भी एक युवक के कथित धर्मांतरण का वीडियो वायरल होने के बाद पूरा बाजार बंद रहा था। ग्रामीणों और हिंदू संगठनों ने “धर्म परिवर्तन कराने वाले गिरोह” के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर कलेक्टरेट पर प्रदर्शन किया था।
राजस्थान का नया सख्त कानून
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब राजस्थान में ‘राजस्थान धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम 2025’ लागू हो चुका है। इस नए कानून के तहत प्रावधान काफी कड़े कर दिए गए हैं:
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सजा: जबरन या लालच देकर धर्मांतरण कराने पर 10 साल तक की जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है।
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सूचना: किसी भी धर्मांतरण से पहले जिला मजिस्ट्रेट (DM) को कम से कम 60 से 90 दिन पहले सूचना देना अनिवार्य है।
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सामूहिक धर्मांतरण: सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में उम्रकैद तक की सजा हो सकती है।
वर्तमान स्थिति
बूंदी पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी को भी कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी। पुलिस के अनुसार, अभी जांच जारी है कि क्या ये धर्मांतरण वाकई जबरन किए जा रहे थे या ये केवल धार्मिक सभाएं थीं। प्रशासन ने आम जनता से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।
राजस्थान सरकार ने 2025 में पारित विधेयक के जरिए अवैध धर्मांतरण को गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में डाल दिया है, जिससे अब पुलिस को बिना वारंट गिरफ्तारी के अधिकार मिल गए हैं।
Matribhumisamachar


