भोपाल । सोमवार, 4 मई 2026
देश भर में राम भक्ति के अनगिनत रूप देखने को मिलते हैं, लेकिन मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में एक ऐसा अनूठा प्रयास किया गया है जो प्राचीन परंपरा और आधुनिक तकनीक का अद्भुत मेल है। आमतौर पर हम रामायण को कागज की किताबों या मोबाइल की डिजिटल स्क्रीन पर पढ़ते हैं, लेकिन अब इसे पत्थरों पर जीवंत किया गया है।
🗿 पत्थरों पर उकेरा गया रामायण का सार
इंदौर के एडवोकेट लोकेश मंगल ने एक ऐसी ‘पाषाण रामायण’ तैयार की है, जिसमें 108 पत्थरों के माध्यम से पूरी रामकथा को संजोया गया है। यह केवल लिखित ग्रंथ नहीं है, बल्कि इसमें चित्रों और श्लोकों का ऐसा संगम है कि कोई भी व्यक्ति कुछ ही समय में रामायण के मूल दर्शन को समझ सकता है।
🛠️ निर्माण प्रक्रिया: प्राचीन कला और लेजर का मेल
इस परियोजना की सबसे खास बात इसकी निर्माण तकनीक है। चूँकि मानव सभ्यता ने अपने लेखन की शुरुआत पत्थरों (शिलालेखों) से ही की थी, इसीलिए इस माध्यम को चुना गया।
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तैयारी: सबसे पहले पत्थरों को 4×4 इंच के 108 सटीक टुकड़ों में काटा गया।
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डिजिटल डिजाइन: चित्रों और श्लोकों के लिए विशेष PLT फाइलें तैयार की गईं।
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लेजर तकनीक: पारंपरिक छेनी-हथौड़ी के बजाय आधुनिक लेजर मशीन का उपयोग किया गया, जिससे चित्रों में सजीवता और बारीकी आई है।
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समय: इस पूरे अनुष्ठान रूपी कार्य को संपन्न करने में मात्र 8 दिन का समय लगा।
🚩 युवाओं को धर्म से जोड़ने का लक्ष्य
आज की पीढ़ी जो तकनीक से जुड़ी है, उन्हें अपनी जड़ों की ओर वापस लाने के लिए यह प्रयास किया गया है। इसमें भगवान राम के जन्म के उद्देश्य से लेकर, माता सीता का हरण, रावण वध, हनुमान जी की अटूट भक्ति और गायत्री मंत्र के वैज्ञानिक व आध्यात्मिक महत्व को सरल भाषा में समझाया गया है।
इस पुनीत कार्य में जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज का विशेष मार्गदर्शन और आर्थिक सहयोग प्राप्त हुआ है। उनके अनुसार, यह कलाकृति न केवल धार्मिक है बल्कि कला के क्षेत्र में एक नया मील का पत्थर भी है।
🔍 मुख्य तथ्य (Latest Insights)
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सजीव चित्रण: लेजर तकनीक के कारण चित्रों में गहराई (3D प्रभाव) महसूस होती है, जिससे प्रसंगों को समझना आसान हो गया है।
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पोर्टेबिलिटी: 4×4 इंच के छोटे आकार के कारण इन 108 पत्थरों को आसानी से सहेजकर रखा जा सकता है और किसी प्रदर्शनी का हिस्सा बनाया जा सकता है।
Matribhumisamachar


