उदयपुर । सोमवार, 8 जून 2026
राजस्थान के उदयपुर जिले से जबरन और प्रलोभन आधारित धार्मिक रूपांतरण का एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जिले के ऋषभदेव थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कानूवाड़ा बिलखाई, कागदर और खेरवाड़ा के ग्रामीण इलाकों में पिछले लंबे समय से सक्रिय एक अंतरराज्यीय नेटवर्क का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए छत्तीसगढ़ के 3 पादरियों समेत कुल 11 लोगों को गिरफ्तार किया है।
ग्राउंड जीरो से आई रिपोर्ट्स और पुलिस जांच से साफ हुआ है कि किस तरह भोले-भाले गरीब आदिवासियों की मजबूरियों का फायदा उठाकर उन्हें धर्म बदलने के लिए मजबूर किया जा रहा था।
बीमारी ठीक करने का झांसा और बुनियादी जरूरतों का लालच
जांच में सामने आया कि इस रैकेट का काम करने का तरीका (Modus Operandi) बेहद शातिर था। छत्तीसगढ़ और झारखंड से आए मिशनरी पदाधिकारी स्थानीय रसूखदार नेताओं की मदद से सबसे पहले गांवों के गरीब, बीमार और पेयजल संकट से जूझ रहे परिवारों को चिह्नित करते थे।
शुरुआत में गांवों में मुफ्त दवाइयां और धार्मिक पुस्तकें बांटी जाती थीं। इसके बाद, बीमारी ठीक करने के नाम पर ‘चंगाई सभा’ या विशेष प्रार्थना सभाओं का आयोजन किया जाता था। आदिवासियों को यह विश्वास दिलाया जाता था कि ईसाई धर्म अपनाने से उनकी बीमारियां बिना इलाज के ठीक हो जाएंगी। इतना ही नहीं, आर्थिक तंगी से जूझ रहे आदिवासियों को खेतों में कुआं, हैंडपंप और ट्यूबवेल खुदवाने जैसे बड़े प्रलोभन भी दिए जा रहे थे।
देवी-देवताओं को ‘आडंबर’ बताना और सामाजिक दबाव
कानूवाड़ा बिलखाई और कागदर जैसे क्षेत्रों में स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि स्थानीय दावों के अनुसार, करीब 20 से 30 फीसदी आदिवासी परिवार पहले ही इस जाल में फंसकर अपना मूल धर्म छोड़ चुके हैं।
इस नेटवर्क से जुड़े स्थानीय एजेंट नए परिवारों को प्रभावित करने के लिए उनके रिश्तेदारों से फोन करवाते थे। इस दौरान आदिवासियों के पारंपरिक देवी-देवताओं और उनकी प्रकृति-पूजक आस्था को ‘आडंबर’ या ‘अंधविश्वास’ बताकर उनके मन में अपनी संस्कृति के प्रति हीन भावना पैदा करने की कोशिश की जाती थी।
चर्च न आने पर सीधे जान से मारने की धमकी
इस पूरे रैकेट का सबसे काला पक्ष तब सामने आया जब प्रलोभन के बाद धमकी और भय का रास्ता अपनाया गया। शिकायतकर्ता नानालाल कलासुआ ने पुलिस को बताया कि उनके घर के पास ही बाबूलाल नामक व्यक्ति के नेतृत्व में दो दिवसीय प्रार्थना सभा चल रही थी, जिसमें 20 से अधिक गांवों के 200 से ज्यादा लोग जुटे थे।
नानालाल के अनुसार:
“जब मैंने इस सभा और आदिवासियों को बहलाने-फुसलाने का विरोध किया, तो वहां मौजूद दबंगों और बाहरी प्रभारियों ने मुझे सीधे जान से मारने की धमकी दी। चूंकि हमारे गांवों में घर काफी दूर-दूर बने हैं, इसलिए ऐसे अपराधियों से जान का खतरा हमेशा बना रहता है।”
स्थानीय महिलाओं (कमला बाई और गंगा) का भी कहना है कि वे मूल रूप से प्रकृति पूजक हैं और अपनी संस्कृति में बेहद खुश हैं, लेकिन गांव के कुछ दबंगों और बाहरी ताकतों के खौफ के कारण वे खुलकर कुछ बोल नहीं पातीं।
पुलिस की बड़ी कार्रवाई: रिमांड पर आरोपी, खंगाले जा रहे बैंक खाते
मामले की गंभीरता को देखते हुए ऋषभदेव डीएसपी राजीव राहर और थानाधिकारी हेमंत अहारी की टीम ने शनिवार को भारी पुलिस बल के साथ सभा स्थल पर छापेमारी की। पुलिस ने मौके से छत्तीसगढ़ के तीन पादरियों—अमित कुमार (43), पलाश गुल्हाणी (30), और आशीष मसीह (32)—सहित 8 स्थानीय मददगारों को हिरासत में लिया, जिन्हें रविवार को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया।
डीएसपी राजीव राहर ने बताया कि आरोपियों को पुलिस रिमांड पर लिया गया है। पुलिस अब उनके मोबाइल डेटा, कॉल रिकॉर्ड्स और सबसे महत्वपूर्ण रूप से उनके बैंक खातों को खंगाल रही है, ताकि इस पूरे अवैध धर्मांतरण नेटवर्क के पीछे काम कर रही विदेशी या अंतरराज्यीय फंडिंग (Funding Source) का पता लगाया जा सके।
राजनीतिक मोड़: ‘यह एक सुनियोजित अंतरराज्यीय षड्यंत्र’
इस घटना के सामने आने के बाद उदयपुर के सांसद मन्नालाल रावत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे राजस्थान की मूल जनजातीय अस्मिता पर हमला बताते हुए कहा:
“धरातल पर ली गई जानकारी से पता चलता है कि यह कोई सामान्य घटना नहीं बल्कि छत्तीसगढ़-झारखंड से संचालित एक बेहद सुनियोजित अंतरराज्यीय षड्यंत्र है। राजस्थान सरकार ने अवैध धर्म परिवर्तन के खिलाफ कड़े कानून (Rajasthan Freedom of Religion Rules) बनाए हैं, और कानून तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”
दूसरी ओर, हिंदूवादी संगठनों के स्थानीय नेता पन्नालाल मीणा ने आरोप लगाया कि खेरवाड़ा और आसपास के 50 से अधिक गांवों में पिछले 10 वर्षों से यह खेल चल रहा है। उन्होंने डरे हुए भोले आदिवासियों को सुरक्षा का भरोसा दिलाते हुए पुलिस से इस नेटवर्क को जड़ से उखाड़ने की मांग की है।
Matribhumisamachar


