लखनऊ | गुरुवार, 9 अप्रैल 2026
उत्तर प्रदेश में सुरक्षा एजेंसियों ने एक बार फिर एक बड़े अंतर्राष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क की कमर तोड़ दी है। मेरठ के मवाना क्षेत्र के सठला गांव से जुड़े एक संदिग्ध मॉड्यूल के खुलासे के बाद अब इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड आकिब रडार पर है। दुबई में बैठकर इंस्टाग्राम और टेलीग्राम के जरिए भारत में माहौल खराब करने की साजिश रच रहे आकिब के खिलाफ लखनऊ एटीएस (ATS) ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है।
📷 इंस्टाग्राम लाइव पर ‘AK-47’ और खुली धमकी
हाल ही में आकिब ने इंस्टाग्राम लाइव के जरिए एक बार फिर भड़काऊ बयानबाजी की है। चौंकाने वाली बात यह है कि कुछ समय पहले एक वीडियो कॉल के दौरान वह AK-47 और ग्रेनेड जैसे हथियार दिखाते हुए देखा गया था। हालांकि, उस समय स्थानीय स्तर पर इसे “खिलौना और परफ्यूम की बोतल” बताकर जांच में ढील दी गई थी, लेकिन लखनऊ एटीएस की सख्ती के बाद अब बिजनौर और मेरठ पुलिस के उन अधिकारियों पर भी गाज गिरी है जिन्होंने लापरवाही बरती थी।
🚨 ATS की बड़ी कार्रवाई: ‘डेविल’ समेत 4 गिरफ्तार
लखनऊ एटीएस ने 2 अप्रैल को इस मॉड्यूल के चार मुख्य गुर्गों को गिरफ्तार कर एक बड़ी तबाही को टाल दिया:
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साकिब उर्फ ‘डेविल’ व अरबाब: मेरठ के परीक्षितगढ़ (अगवानपुर) के निवासी।
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लोकेश व विकास: गौतमबुद्धनगर (नोएडा) के रहने वाले।
इन आरोपियों के पास से संदिग्ध दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य मिले हैं। जांच में सामने आया कि ये लोग लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन और कई सैन्य ठिकानों की रेकी कर रहे थे।
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🌐 कैसे काम करता है यह ‘दुबई-पाकिस्तान’ नेक्सस?
पूछताछ में हुए खुलासों ने सुरक्षा एजेंसियों के होश उड़ा दिए हैं:
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दुबई कनेक्शन: आकिब दुबई में बैठकर मुख्य संचालक की भूमिका निभा रहा है। उसने ही साकिब (डेविल) को पाकिस्तानी हैंडलर्स से मिलवाया था।
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टेलीग्राम पर भर्ती: ये लोग टेलीग्राम और सिग्नल जैसे एन्क्रिप्टेड ऐप्स पर युवाओं को जोड़ते हैं। वहां ‘गोरक्षा’ और ‘धार्मिक कट्टरता’ जैसे संवेदनशील मुद्दों का हवाला देकर युवाओं का ब्रेनवाश किया जाता है।
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जासूसी का खेल: युवाओं को जासूसी के काम में लगाया जाता है और बदले में उन्हें पाकिस्तानी हैंडलर्स के जरिए मोटी रकम और हथियारों का लालच दिया जाता है।
⚠️ अधिकारियों का रुख और आगामी कदम
मेरठ के एसपी देहात अभिजीत कुमार के अनुसार, आकिब के डिजिटल फुटप्रिंट्स की लगातार निगरानी की जा रही है। एटीएस पहले ही उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी कर चुकी है, जिससे उसका भारत आने का रास्ता बंद हो गया है। वहीं, शामली और कैराना में भी एटीएस की छापेमारी जारी है, जहाँ से 5 अन्य संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है।
निष्कर्ष: यह मामला स्पष्ट करता है कि सोशल मीडिया अब केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि विदेशी ताकतों के लिए स्लीपर सेल तैयार करने का अड्डा बन गया है। एटीएस की मुस्तैदी ने फिलहाल यूपी को एक बड़े खतरे से बचा लिया है।
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