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मुजफ्फरपुर: UPSC की तैयारी कर रही शिक्षिका ने ससुराल पक्ष पर लगाए गंभीर आरोप; धर्म परिवर्तन और प्रताड़ना का मामला दर्ज

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

पटना । रविवार, 10 मई 2026

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के काजी मोहम्मदपुर थाना क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। सादपुरा मिल्की टोला की रहने वाली एक महिला, जो पेशे से शिक्षिका है और UPSC (संघ लोक सेवा आयोग) की तैयारी कर रही है, ने अपने ससुराल वालों पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने और अमानवीय व्यवहार करने का आरोप लगाया है।

पीड़िता की शादी वर्ष 2019 में एक ग्राफिक्स डिजाइनर युवक से हुई थी। महिला का आरोप है कि शादी के बाद से ही उसे दूसरे धर्म की परंपराओं को मानने के लिए मजबूर किया जाने लगा। जब उसने इसका विरोध किया, तो उसके साथ मारपीट की गई और उसे मानसिक रूप से तोड़ दिया गया।

गंभीर आरोप: अस्मिता और मानवाधिकारों का हनन

महिला ने पुलिस को दिए आवेदन में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं:

  • धार्मिक दबाव: ससुराल पक्ष द्वारा उसे प्रतिबंधित मांस खाने और बुर्का पहनने के लिए विवश किया गया।

  • शारीरिक और मानसिक हिंसा: विरोध करने पर 18 फरवरी को उसके साथ मारपीट की गई और कपड़े फाड़कर उसकी अस्मिता भंग करने की कोशिश की गई।

  • सामाजिक बहिष्कार: पीड़िता का दावा है कि 20 से 40 लोगों की पंचायत जुटाकर उसे और उसके पति को बदनाम करने और भीड़ को भड़काने का प्रयास किया गया।

  • बांझपन का ताना: महिला को ‘बांझ’ कहकर लगातार अपमानित किया जाता रहा।

पति का समर्थन और कानूनी पेंच

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण मोड़ यह है कि महिला का पति अपनी पत्नी के साथ खड़ा है। पति द्वारा अपनी पत्नी का समर्थन किए जाने के कारण ससुराल पक्ष (ससुर मो. बशीर, सास सिजला खातून, देवर मो. शम्मीर और देवरानी अंजुम परवीन) और अधिक आक्रोशित हो गया। वर्तमान में ससुर ने अपने ही बेटे और बहू के खिलाफ न्यायालय में ‘भरण-पोषण’ (Maintenance) का वाद दायर कर रखा है, जिससे तनाव और बढ़ गया है।

पुलिस की कार्रवाई और वर्तमान स्थिति

काजी मोहम्मदपुर के थानेदार चंद्रभूषण कुमार सिंह ने पुष्टि की है कि पीड़िता के आवेदन के आधार पर नामजद एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस फिलहाल इसे एक जटिल पारिवारिक विवाद मानकर चल रही है, लेकिन लगाए गए आरोपों (दहेज उत्पीड़न, घरेलू हिंसा, और धार्मिक प्रताड़ना) की गंभीरता को देखते हुए साक्ष्यों को जुटाया जा रहा है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।