तेहरान. ईरान में जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों ने अब एक भीषण मानवीय संकट का रूप ले लिया है। दिसंबर 2025 के अंत में मुद्रा की गिरती कीमतों के खिलाफ शुरू हुआ आक्रोश अब पूरे देश में व्यापक राजनीतिक विद्रोह में बदल चुका है। मानवाधिकार संगठनों द्वारा जारी हालिया आंकड़ों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है।
हताहतों के भयावह आंकड़े
अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी (HRANA) की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दो हफ्तों से चल रही हिंसा में मरने वालों की संख्या 538 तक पहुंच गई है। रिपोर्ट के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
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प्रदर्शनकारी: सुरक्षा बलों की कार्रवाई में अब तक लगभग 490 प्रदर्शनकारियों की जान जा चुकी है।
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सुरक्षाकर्मी: हिंसक झड़पों में 48 सुरक्षाकर्मियों के मारे जाने की भी पुष्टि हुई है।
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हिरासत: अब तक 10,600 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। कार्यकर्ताओं का मानना है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है, क्योंकि ईरान के कई प्रांतों में इंटरनेट और संचार सेवाएं पूरी तरह ठप हैं।
महंगाई से शुरू हुआ ‘सत्ता विरोधी’ संग्राम
इन प्रदर्शनों की चिंगारी ईरान की आधिकारिक मुद्रा ‘रियाल’ की ऐतिहासिक गिरावट और बेलगाम महंगाई के कारण भड़की थी। बुनियादी वस्तुओं की कीमतों में आए उछाल ने आम नागरिकों को सड़कों पर उतरने को मजबूर कर दिया। हालांकि, अब प्रदर्शनकारियों की मांगें आर्थिक सुधारों से आगे बढ़कर सीधे राजनीतिक बदलाव और सरकार की नीतियों के विरोध तक पहुंच गई हैं।
ईरान की जवाबी चेतावनी और अंतरराष्ट्रीय तनाव
ईरानी सरकार ने इन प्रदर्शनों को आंतरिक असंतोष मानने से इनकार कर दिया है। अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि इस अशांति के पीछे अमेरिका और इजरायल जैसी बाहरी ताकतों का हाथ है।
तनाव उस समय और बढ़ गया जब ईरान ने एक कड़ा बयान जारी कर चेतावनी दी कि:
“यदि स्थिति को नियंत्रित करने के बहाने अमेरिकी बलों ने किसी भी तरह का सैन्य हस्तक्षेप किया, तो ईरान क्षेत्र में स्थित सभी अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने में संकोच नहीं करेगा।”
फिलहाल ईरान के कई प्रमुख शहरों में तनाव चरम पर है और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन लगातार शांति और संयम बरतने की अपील कर रहे हैं।
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