लखनऊ. उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में स्थित हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) के बायो गैस प्लांट में हुई दोहरी हत्या ने प्रदेश की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस सनसनीखेज वारदात के बाद योगी सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए प्रशासनिक फेरबदल किया है। लापरवाही बरतने के आरोप में बदायूं के एसएसपी (SSP) डॉ. बृजेश कुमार सिंह को पद से हटा दिया गया है, वहीं अंकिता शर्मा को जिले की नई पुलिस कप्तान नियुक्त किया गया है।
क्या है पूरा मामला?
यह खौफनाक वारदात दातागंज कोतवाली क्षेत्र के सैजनी गांव स्थित HPCL के कंप्रेस्ड बायो गैस (CBG) प्लांट में गुरुवार दोपहर घटित हुई। आरोपी अजय प्रताप सिंह, जो पहले इसी प्लांट में एक वेंडर के रूप में काम करता था, ने प्लांट के भीतर घुसकर अंधाधुंध फायरिंग की। इस हमले में:
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सुधीर गुप्ता (उप महाप्रबंधक – DGM)
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हर्षित मिश्रा (सहायक मुख्य प्रबंधक)
की मौके पर ही गोली मारकर हत्या कर दी गई। हत्या के बाद आरोपी ने खुद थाने पहुंचकर आत्मसमर्पण कर दिया।
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पुलिस की लापरवाही पर उठे सवाल
इस हत्याकांड के पीछे सबसे चौंकाने वाला पहलू पुलिस की निष्क्रियता रही। मृतक सुधीर गुप्ता ने आरोपी अजय के खिलाफ पहले ही दो बार शिकायत दर्ज कराई थी:
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अक्टूबर 2025: अपहरण की कोशिश और धमकी का मामला।
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4 फरवरी 2026: रास्ता रोकने और जान से मारने की धमकी।
इन गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज होने के बावजूद स्थानीय पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया। सूत्रों के अनुसार, आरोपी 8 महीने पहले नौकरी से निकाले जाने के बाद से ही सुधीर गुप्ता से रंजिश रख रहा था।
प्रशासनिक हंटर: SSP और थाना प्रभारी पर गिरी गाज
घटना की गंभीरता को देखते हुए शासन ने तत्काल रिपोर्ट तलब की, जिसके बाद बड़ी कार्रवाई की गई:
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एसएसपी का तबादला: डॉ. बृजेश कुमार सिंह को बदायूं से हटाकर लखनऊ में पुलिस अधीक्षक (लॉजिस्टिक्स) बनाया गया है।
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निलंबन: मूसाझाग थाने के तत्कालीन प्रभारी अजय कुमार और दारोगा धर्मेंद्र को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
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नई नियुक्ति: तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी अंकिता शर्मा अब बदायूं की नई एसएसपी होंगी, जिनसे जिले में कानून व्यवस्था को पटरी पर लाने की उम्मीद है।
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पुलिस मुठभेड़ में घायल हुआ आरोपी
गिरफ्तारी के बाद गुरुवार रात जब पुलिस टीम आरोपी अजय प्रताप सिंह को हथियार बरामदगी के लिए जंगल ले गई, तो उसने वहां छिपाकर रखे एक अन्य तमंचे से सिपाही ओमवीर पर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने आरोपी के दोनों घुटनों में गोली मारकर उसे घायल कर दिया, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
अब ‘आर्थिक चोट’ की तैयारी
प्रशासन अब आरोपी के खिलाफ केवल आपराधिक ही नहीं, बल्कि आर्थिक कार्रवाई भी कर रहा है:
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संपत्तियों की जांच: आरोपी द्वारा बनाई गई संपत्तियों का ब्यौरा जुटाया जा रहा है, जिस पर बुलडोजर की कार्रवाई भी संभव है।
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राशन की दुकान: आरोपी की मां किरन देवी के नाम आवंटित सरकारी राशन की दुकान की जांच शुरू हो गई है और इसे जल्द ही निरस्त किया जा सकता है।
निष्कर्ष: यह घटना औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा और स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा सबक है। अधिकारियों की शिकायतों को नजरअंदाज करना दो परिवारों की तबाही का कारण बना।
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