कोटा | बुधवार, 15 अप्रैल 2026
राजस्थान की कोटा पुलिस ने नकली भारतीय मुद्रा (FICN) खपाने वाले एक अंतरराज्यीय लिंक से जुड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में जाहिद और इस्लाम सहित कुल 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह बेहद सुनियोजित तरीके से असली नोटों के बदले आधी से भी कम कीमत पर नकली नोट खरीदता था और उन्हें स्थानीय बाजारों में असली बताकर खपा देता था।
चेचट पुलिस की नाकाबंदी में धरे गए आरोपी
मामले का खुलासा तब हुआ जब कोटा ग्रामीण की चेचट थाना पुलिस रविवार रात मोड़क रोड के पास गश्ती और नाकाबंदी कर रही थी। पुलिस ने संदेह के आधार पर दो युवकों—जाहिद (19) और इस्लाम (26)—को रोका। तलाशी लेने पर उनके पास से ₹500 के तीन और ₹200 का एक नकली नोट बरामद हुआ।
शुरुआत में यह मामला छोटा लग रहा था, लेकिन जब कड़ाई से पूछताछ हुई, तो एक बड़े नेटवर्क की परतें खुलती चली गईं।
₹30,000 के नकली नोट सिर्फ ₹12,500 में!
पूछताछ में आरोपियों ने चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने बताया कि वे बारां जिले के रहने वाले वकार और वसीम से नकली नोटों की खेप लेते थे। आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे ₹30,000 मूल्य के नकली नोटों का बंडल महज ₹12,500 में खरीदते थे। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बारां से वकार, वसीम और मुख्य सप्लायर सोहेल को भी गिरफ्तार कर लिया है।
गिरोह की कार्यप्रणाली: छोटे दुकानदार और भीड़भाड़ निशाने पर
पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह मुख्य रूप से निम्नलिखित तरीकों से काम करता था:
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टारगेट मार्केट: ग्रामीण क्षेत्र के हाट-बाजार और शहर के भीड़भाड़ वाले इलाके।
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सॉफ्ट टारगेट: छोटे चाय के ठेले, सब्जी विक्रेता और किराना स्टोर, जहां अक्सर नोटों की जांच मशीनों से नहीं की जाती।
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तरीका: बड़े नोट (जैसे ₹500) देकर छोटी वस्तु खरीदना, ताकि बाकी के पैसे असली मुद्रा के रूप में वापस मिल सकें।
कानूनी कार्रवाई और नई धाराएं
कोटा ग्रामीण एसपी सुजीत शंकर के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं (जैसे धारा 179, 180, 318(2) और 61(2)) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इन नोटों की छपाई कहां हो रही थी और क्या इनके तार राजस्थान से बाहर अन्य राज्यों से भी जुड़े हैं।
💡 आम जनता के लिए पुलिस की एडवाइजरी
नकली नोटों से बचने के लिए पुलिस और आरबीआई ने कुछ सुरक्षा मानकों पर ध्यान देने की सलाह दी है:
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गांधी जी का वॉटरमार्क: नोट को रोशनी के सामने रखने पर महात्मा गांधी की तस्वीर और मूल्यवर्ग का वॉटरमार्क स्पष्ट दिखना चाहिए।
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सुरक्षा धागा: ₹500 के नोट में धागे का रंग मोड़ने पर हरे से नीला होता है।
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रफ प्रिंटिंग: नोट के कुछ हिस्से जैसे अशोक स्तंभ और गांधी जी की तस्वीर छूने पर खुरदरी (उभरी हुई) महसूस होनी चाहिए।
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संदेह होने पर क्या करें? यदि कोई व्यक्ति संदिग्ध नोट देने की कोशिश करे, तो तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या ‘112’ नंबर पर सूचित करें।
Matribhumisamachar


