अयोध्या | गुरुवार, 16 अप्रैल 2026
श्रीराम जन्मभूमि परिसर में श्रद्धालुओं के लिए एक नया अध्याय शुरू हो गया है। रामलला के मुख्य मंदिर के साथ-साथ अब परिसर में स्थित सभी 7 पूरक (उप) मंदिरों और कुबेर टीला के द्वार भक्तों के लिए खोल दिए गए हैं। इस विस्तार के बाद पूजा व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बड़े पैमाने पर पुजारियों (अर्चकों) की भर्ती प्रक्रिया तेज कर दी है।
13 अप्रैल से बदली व्यवस्था: क्यों पड़ी अतिरिक्त पुजारियों की जरूरत?
13 अप्रैल 2026 से राम मंदिर परिसर के परकोटे में बने 6 उप-मंदिरों और कुबेर टीला स्थित कुबेरेश्वर महादेव मंदिर में नियमित दर्शन शुरू हो चुके हैं।
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बढ़ता कार्यभार: वर्तमान में मंदिर में केवल 20 नियमित पुजारी कार्यरत हैं।
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तीन शिफ्टों में ड्यूटी: ट्रस्ट के अनुसार, उप-मंदिरों में सुबह से शाम तक दर्शन के लिए कम से कम 3 शिफ्टों में ड्यूटी की आवश्यकता है।
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नई नियुक्तियां: 16 अप्रैल की ताजा रिपोर्टों के अनुसार, रिक्त पदों को भरने के लिए तत्काल प्रभाव से 13 से 15 नए अर्चकों की नियुक्ति की प्रक्रिया आज (बैसाख कृष्ण चतुर्दशी) से शुरू की जा रही है। कुल मिलाकर परिसर के लिए 50 पुजारियों का लक्ष्य रखा गया है।
किन मंदिरों में होगी नई तैनाती?
नए पुजारियों को विशेष रूप से उन स्थानों पर तैनात किया जाएगा जहाँ हाल ही में दर्शन शुरू हुए हैं:
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परकोटे के भीतर: 6 देवी-देवताओं के मंदिर।
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परिसर के बाहर: शेषावतार मंदिर।
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कुबेर टीला: यहाँ स्थित कुबेरेश्वर महादेव मंदिर में सुबह 7 से शाम 7 बजे तक विशेष ड्यूटी लगेगी।
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राम दरबार: मुख्य मंदिर की पूजा और भोग व्यवस्था में सहायता।
वेतन और सुविधाएं: क्या मिलेगा पुजारियों को?
ट्रस्ट ने पुजारियों के मानदेय और सुविधाओं में भी व्यापक सुधार किए हैं:
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वेतन: वरिष्ठ पुजारियों और नए अर्चकों का मासिक वेतन अब ₹36,000 से ₹43,000 के बीच है।
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अन्य लाभ: पुजारियों को साप्ताहिक अवकाश (Weekly Off), आवास भत्ता, चिकित्सा बीमा और EPF (भविष्य निधि) जैसी कॉर्पोरेट स्तर की सुविधाएं दी जा रही हैं।
भक्तों के लिए जरूरी खबर: पास के बिना नहीं होंगे उप-मंदिरों के दर्शन
यदि आप भी इन पूरक मंदिरों के दर्शन करना चाहते हैं, तो यह ध्यान रखें:
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ऑनलाइन बुकिंग अनिवार्य: उप-मंदिरों में प्रवेश के लिए ट्रस्ट के पोर्टल से ऑनलाइन पास लेना अनिवार्य है।
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लिमिटेड स्लॉट: प्रतिदिन केवल 10,000 भक्तों को ही इन मंदिरों में प्रवेश की अनुमति दी जा रही है।
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समय: दर्शन के लिए सुबह से शाम तक 7 अलग-अलग समय स्लॉट (Slots) उपलब्ध कराए गए हैं।
ट्रस्ट का बयान: मंदिर के व्यवस्थापक गोपाल राव ने स्पष्ट किया है कि “नई नियुक्तियों में उन वेदपाठियों को प्राथमिकता दी जा रही है जो पहले ही प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं। इससे पूजा और अनुष्ठानों की शुद्धता बनी रहेगी और श्रद्धालुओं को एक दिव्य अनुभव मिलेगा।”
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