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गुप्त नवरात्रि 2026 कब है? जानें शुभ मुहूर्त और सुख-समृद्धि के अचूक उपाय

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हिंदू पंचांग के अनुसार, वर्ष में चार नवरात्रि आती हैं—चैत्र, शारदीय और दो गुप्त नवरात्रि (माघ और आषाढ़)। माघ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होने वाली यह ‘गुप्त नवरात्रि’ तंत्र-मंत्र और आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त करने के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है। माघ मास की गुप्त नवरात्रि शक्ति की साधना के लिए अत्यंत विशेष मानी जाती है। सामान्य नवरात्रि की तुलना में इसमें दस महाविद्याओं की गुप्त रूप से साधना की जाती है।

1. शुभ मुहूर्त और तिथियां (Shubh Muhurat)

वर्ष 2026 में माघ गुप्त नवरात्रि 19 जनवरी से प्रारंभ होकर 27 जनवरी तक रहेगी।

  • कलश स्थापना मुहूर्त: 19 जनवरी 2026, सुबह 07:15 AM से 08:45 AM तक।

  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:11 PM से 12:54 PM तक (यह कलश स्थापना के लिए सर्वश्रेष्ठ समय है)।

  • प्रतिपदा तिथि समाप्त: 19 जनवरी को शाम 06:22 PM पर।

2. गुप्त नवरात्रि का विशेष महत्व

सामान्य नवरात्रि में माता के नौ स्वरूपों की सार्वजनिक पूजा होती है, लेकिन गुप्त नवरात्रि में ‘दस महाविद्याओं’ की गोपनीय पूजा की जाती है।

  • उद्देश्य: यह नवरात्रि कठिन रोगों से मुक्ति, शत्रु विजय और आध्यात्मिक सिद्धि के लिए प्रसिद्ध है।

  • गोपनीयता: ऐसी मान्यता है कि इस नवरात्रि की पूजा को जितना ‘गुप्त’ रखा जाता है, उसका फल उतना ही अधिक मिलता है।

3. इन 10 महाशक्तियों की होती है पूजा

इस दौरान साधक माँ काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की आराधना करते हैं।

4. सरल पूजा विधि (Puja Vidhi)

यदि आप घर पर सामान्य रूप से पूजा करना चाहते हैं, तो इस विधि का पालन करें:

  1. शुद्धिकरण: ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और लाल वस्त्र धारण करें।

  2. कलश स्थापना: मंदिर में एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर माँ दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करें और कलश रखें।

  3. अखंड ज्योति: संभव हो तो घी का दीपक प्रज्वलित करें जो नौ दिनों तक जलता रहे।

  4. भोग: माँ को लाल फूल, श्रृंगार सामग्री और ऋतु फल अर्पित करें।

  5. मंत्र जप: माँ दुर्गा के ‘नवाण मंत्र’ या ‘दुर्गा सप्तशती’ का पाठ करें।

  6. सात्विकता: इन नौ दिनों में सात्विक भोजन करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें।

5. राशि अनुसार विशेष उपाय

  • मेष और वृश्चिक: माँ को गुड़ का भोग लगाएं।

  • वृषभ और तुला: श्वेत पुष्प और मिश्री अर्पित करें।

  • मिथुन और कन्या: हरे फल या मूंग की मिठाई का भोग लगाएं।

  • कर्क: दूध से बनी मिठाई चढ़ाएं।

  • सिंह: लाल चंदन और तांबे के पात्र में जल अर्पित करें।

  • धनु और मीन: पीली मिठाई और हल्दी की गांठ चढ़ाएं।

  • मकर और कुंभ: नीले फूल या सूखे मेवे अर्पित करें।

सावधानी: गुप्त नवरात्रि मुख्य रूप से साधकों के लिए है। सामान्य गृहस्थों को सात्विक पूजा ही करनी चाहिए और तामसिक या तांत्रिक विधियों से बचना चाहिए।

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