शनिवार, जुलाई 11 2026 | 11:15:14 PM
Breaking News
Home / राज्य / महाराष्ट्र / शिवसेना यूबीटी संकट: दिल्ली की इमरजेंसी बैठक से 6 सांसद नदारद, क्या महाराष्ट्र में फिर होने वाली है बड़ी टूट?

शिवसेना यूबीटी संकट: दिल्ली की इमरजेंसी बैठक से 6 सांसद नदारद, क्या महाराष्ट्र में फिर होने वाली है बड़ी टूट?

Follow us on:

मुंबई । गुरुवार, 18 जून 2026

महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर भूचाल आ गया है। साल 2022 में एकनाथ शिंदे की अगुवाई में हुई ऐतिहासिक बगावत के जख्म अभी पूरी तरह भरे भी नहीं थे कि उद्धव ठाकरे की शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे – UBT) पर एक और बड़ा संकट मंडराने लगा है। दिल्ली में पार्टी द्वारा बुलाई गई एक बेहद महत्वपूर्ण और ‘इमरजेंसी’ बैठक ने इस संकट की कगार पर खड़े राजनीतिक घटनाक्रम को पूरी तरह सार्वजनिक कर दिया है।

पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की तमाम कोशिशों और कड़े निर्देशों के बावजूद, लोकसभा के अधिकांश सांसदों ने इस बैठक से दूरी बना ली। इसके बाद से महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक हलकों में अटकलों और दावों का बाजार बेहद गर्म है।

व्हिप का उल्लंघन: आखिर बैठक में क्या हुआ?

पार्टी के भीतर पनप रहे असंतोष और ‘ऑपरेशन टाइगर’ (जिसके तहत सांसदों के पाला बदलने की चर्चा है) की अफवाहों पर लगाम लगाने के लिए शिवसेना (UBT) के मुख्य सचेतक (Chief Whip) अनिल देसाई ने तीन-लाइन का सख्त व्हिप जारी किया था। सभी सांसदों को गुरुवार, 18 जून 2026 को सुबह 11 बजे संसद भवन स्थित कार्यालय में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया था।

लेकिन जब बैठक शुरू हुई, तो नजारा चौंकाने वाला था:

  • पार्टी के कुल 9 लोकसभा सांसदों में से केवल 3 सांसद ही बैठक में पहुंचे (अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे)।

  • बाकी 6 सांसद बैठक से पूरी तरह नदारद रहे। इनमें संजय दिना पाटिल, संजय देशमुख, नागेश पाटिल अष्टीकर, ओमराजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे और संजय जाधव शामिल हैं।

  • बैठक में राज्यसभा सांसद संजय राउत भी मौजूद थे, जिन्होंने बाद में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पार्टी का पक्ष रखा।

महत्वपूर्ण सुधार (Correction Note): कुछ शुरुआती मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया चर्चाओं में यह दावा किया जा रहा था कि यह बैठक बुधवार (17 जून) को ही समाप्त हो गई या यह महज एक अनौपचारिक चर्चा थी। लेकिन वास्तविक और संशोधित जानकारी के अनुसार, सांसदों को बुधवार को केवल दिल्ली पहुंचने का सख्त निर्देश (व्हिप) जारी किया गया था, जबकि मूल आधिकारिक और निर्णायक संसदीय दल की आपातकालीन बैठक आज यानी गुरुवार, 18 जून 2026 को आयोजित की गई है।

‘ऑपरेशन टाइगर’ और करोड़ो के ऑफर का आरोप

इस पूरी हलचल के बीच शिवसेना (UBT) के फायरब्रांड नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने विपक्षी खेमे पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। संजय राउत ने दावा किया कि पार्टी के सांसदों को पाला बदलने के लिए 15-15 करोड़ रुपये का एडवांस (कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार कुल ऑफर 50 करोड़ तक का है) दिया जा रहा है। उन्होंने इसे महाराष्ट्र के जनादेश के साथ गद्दारी और पैसे के दम पर लोकतंत्र को खरीदने की कोशिश करार दिया।

दूसरी तरफ, राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि ये 6 बागी सांसद दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं और वे मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली मूल शिवसेना या भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के संपर्क में हैं।

क्या है 2/3 का कानूनी गणित?

भारत में लागू दल-बदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law – 10th Schedule) के तहत अगर किसी पार्टी के निर्वाचित सदस्य अलग गुट बनाना चाहते हैं या किसी दूसरी पार्टी में विलय करना चाहते हैं, तो उनकी सदस्यता बचाने के लिए कम से कम दो-तिहाई (2/3) सदस्यों का एक साथ आना अनिवार्य है

शिवसेना (UBT) के पास लोकसभा में कुल 9 सांसद हैं। गणित के हिसाब से:

$$\text{9 का } \frac{2}{3} = 6 \text{ सांसद}$$

यानी, जो 6 सांसद आज की बैठक से गायब रहे, यदि वे एक साथ मिलकर कोई नया कदम उठाते हैं या शिंदे गुट में शामिल होते हैं, तो तकनीकी और कानूनी रूप से उनकी संसद सदस्यता पर खतरा काफी कम हो सकता है। यही कारण है कि उद्धव ठाकरे खेमे की चिंताएं बेहद गहरी हो गई हैं।

उद्धव गुट का पलटवार: कारण बताओ नोटिस और लोकसभा स्पीकर से गुहार

बैठक से पीठ दिखाने वाले सांसदों पर शिवसेना (UBT) ने तुरंत कानूनी और संगठनात्मक शिकंजा कसना शुरू कर दिया है:

  1. कारण बताओ नोटिस: व्हिप का उल्लंघन करने वाले सभी 6 सांसदों को तुरंत ‘शो-कॉज’ (कारण बताओ) नोटिस जारी कर दिया गया है।

  2. स्पीकर से मुलाकात: अनिल देसाई और अरविंद सावंत ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर एक ‘कैविएट पत्र’ (Caveat Letter) सौंपा है। इस पत्र में सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए मांग की गई है कि यदि कोई भी बागी गुट अलग मान्यता का दावा करता है, तो बिना मूल पार्टी (UBT) का पक्ष सुने कोई फैसला न लिया जाए।

संजय राउत ने कड़े शब्दों में कहा कि जो लोग संकट के समय पार्टी के साथ नहीं हैं, उन्हें जनता कभी माफ नहीं करेगी और पार्टी उनके खिलाफ अयोग्यता (Disqualification) की कार्रवाई शुरू कर रही है।

आगे क्या होगा?

यदि ये छह सांसद आधिकारिक रूप से अलग गुट घोषित करते हैं, तो संसद में विपक्षी गठबंधन (INDIA ब्लॉक) की ताकत कम होगी और एनडीए (NDA) का पलड़ा और मजबूत हो जाएगा। महाराष्ट्र में आने वाले दिनों में होने वाले राजनीतिक घटनाक्रमों और चुनावों पर भी इसका सीधा असर पड़ना तय है। अब देखना यह है कि ये अनुपस्थित सांसद अपना अगला आधिकारिक कदम क्या उठाते हैं।

मित्रों,
मातृभूमि समाचार का उद्देश्य मीडिया जगत का ऐसा उपकरण बनाना है, जिसके माध्यम से हम व्यवसायिक मीडिया जगत और पत्रकारिता के सिद्धांतों में समन्वय स्थापित कर सकें। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए हमें आपका सहयोग चाहिए है। कृपया इस हेतु हमें दान देकर सहयोग प्रदान करने की कृपा करें। हमें दान करने के लिए निम्न लिंक पर क्लिक करें -- Click Here


* 1 माह के लिए Rs 1000.00 / 1 वर्ष के लिए Rs 10,000.00

Contact us

Check Also

मुंबई में मुहर्रम जुलूस में जहर से भरे चूहे मारने वाले 14900 कैप्सूल बांटने का आरोपित फैयाज

मुंबई में बड़ी त्रासदी टली: मुहर्रम के जुलूस में ‘दर्द निवारक’ बताकर जहर बांटने वाला फैयाज प्रेमजी गिरफ्तार, 14,900 कैप्सूल जब्त

मुंबई । रविवार, 27 जून 2026 दक्षिण मुंबई में मुहर्रम के जुलूस (अशूरा) के दौरान …