चंडीगढ़. पंजाब की भगवंत मान सरकार में आज उस समय हड़कंप मच गया जब कैबिनेट मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। यह नाटकीय घटनाक्रम पंजाब स्टेट वेयरहाउस कॉरपोरेशन (PSWC) के जिला मैनेजर डॉ. गगनदीप सिंह रंधावा की कथित आत्महत्या के बाद शुरू हुआ। रंधावा ने मरने से पहले एक भावुक वीडियो जारी कर सीधे तौर पर मंत्री पर प्रताड़ना के आरोप लगाए थे।
1. वो 12 सेकंड का वीडियो जिसने हिला दी सरकार
अमृतसर में तैनात 45 वर्षीय अधिकारी गगनदीप सिंह रंधावा ने शनिवार तड़के अपने रंजीत एवन्यू स्थित निवास पर सल्फास खाकर जान दे दी। जहर के असर से पहले उन्होंने रात 12:12 बजे एक वीडियो रिकॉर्ड किया, जिसमें उन्होंने कहा:
“खा लई सल्फास तुहाडे यार ने… मंत्री लालजीत भुल्लर दे डर तों, हुण नहीं मैं बचदा।” (तुम्हारे दोस्त ने मंत्री लालजीत भुल्लर के डर से सल्फास खा ली है, अब मैं नहीं बचूँगा।)
2. विवाद की असली वजह: टेंडर और ‘गनपॉइंट’ पर पिटाई के आरोप
सूत्रों और विपक्षी नेताओं द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, यह मामला गोदामों (Warehouses) के टेंडर आवंटन से जुड़ा है।
-
नियमों का पालन: आरोप है कि रंधावा पर उन गोदामों के टेंडर पास करने का दबाव था जो तकनीकी मानदंडों को पूरा नहीं करते थे।
-
बंदूक की नोक पर प्रताड़ना: शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने आरोप लगाया कि 13 मार्च को रंधावा को मंत्री के आवास पर बुलाया गया, जहाँ उनके साथ मारपीट की गई और बंदूक की नोक पर उनसे एक वीडियो रिकॉर्ड करवाया गया जिसमें उन्हें जबरन यह कबूल करने को कहा गया कि उन्होंने 10 लाख रुपये की रिश्वत ली है।
3. मुख्यमंत्री भगवंत मान का बड़ा फैसला
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने तुरंत मंत्री भुल्लर का इस्तीफा मांगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि:
-
निष्पक्ष जांच: जांच को प्रभावित होने से बचाने के लिए मंत्री को हटाया गया है।
-
मुख्य सचिव को कमान: पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच पंजाब के मुख्य सचिव केएपी सिन्हा को सौंप दी गई है।
-
ज़ीरो टॉलरेंस: सीएम ने कहा कि किसी भी अधिकारी को इस हद तक मजबूर करना कि वह अपनी जान दे दे, बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विपक्ष की मांगें और राजनीतिक प्रतिक्रिया
| नेता / पार्टी | मुख्य मांग |
| सुखपाल खैहरा (कांग्रेस) | धारा 306 के तहत FIR दर्ज कर मंत्री की तुरंत गिरफ्तारी हो। |
| बिक्रम मजीठिया (अकाली दल) | राज्य की जांच पर भरोसा नहीं, CBI जांच की जरूरत है। |
| सुनील जाखड़ (BJP) | मुख्यमंत्री के पास पद पर रहने का नैतिक अधिकार नहीं, इसे ‘सरकारी हत्या’ बताया। |
आगे क्या होगा?
मुख्य सचिव की जांच रिपोर्ट इस मामले में निर्णायक साबित होगी। रंधावा का मोबाइल फोन अब इस केस का सबसे बड़ा सबूत है, जिसे फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। इसमें वो कथित वीडियो और संदेश हो सकते हैं जो रंधावा ने वरिष्ठ अधिकारियों को मदद के लिए भेजे थे।
निष्कर्ष: यह घटना पंजाब प्रशासन में ‘पॉलिटिकल प्रेशर’ और ‘करप्शन’ के खिलाफ एक बड़ी बहस छेड़ चुकी है। क्या मान सरकार इस जांच के जरिए अपनी ‘कट्टर ईमानदार’ छवि बचा पाएगी? यह आने वाले दिनों में साफ होगा।
Matribhumisamachar


