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अयोध्या में बनेगा देश का पहला मंदिर संग्रहालय: टाटा ग्रुप की 600 करोड़ की सौगात

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
4 Min Read

लखनऊ । गुरुवार, 23 अप्रैल, 2025

अयोध्या की पावन धरती अब केवल राम मंदिर के लिए ही नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता के कलात्मक वैभव को संजोने वाले एक भव्य केंद्र के रूप में भी जानी जाएगी। अयोध्या विकास प्राधिकरण (ADA) ने हाल ही में जमथराघाट में बनने वाले देश के पहले मंदिर संग्रहालय के मानचित्र को औपचारिक स्वीकृति दे दी है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को टाटा ग्रुप की संस्था ‘टाटा फाउंडेशन’ द्वारा विकसित किया जा रहा है।

मंदिर संग्रहालय: एक नजर में

यह संग्रहालय केवल एक इमारत नहीं, बल्कि भारतीय इतिहास और वास्तुकला का एक जीवित दस्तावेज होगा।

1. भव्यता और क्षेत्रफल

यह संग्रहालय लगभग 52 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैला होगा। परियोजना की कुल लागत ₹600 करोड़ आंकी गई है, जिसका पूरा वित्तीय भार टाटा समूह वहन करेगा। उत्तर प्रदेश सरकार ने इसके लिए भूमि पहले ही आवंटित कर दी है और क्षेत्र की फेंसिंग का कार्य भी पूरा हो चुका है।

2. मंदिर की मर्यादा का सम्मान

इस परियोजना की सबसे विशिष्ट बात इसकी ऊंचाई है। अयोध्या के रिस्ट्रिक्टेड टेंपल जोन के मानकों के अनुसार:

  • ऊंचाई की सीमा: संग्रहालय के किसी भी भवन की ऊंचाई 7 मीटर से अधिक नहीं होगी।

  • राम मंदिर से तुलना: जहां श्री राम मंदिर की ऊंचाई 49 मीटर है, वहीं संग्रहालय की ऊंचाई कम रखी गई है ताकि मंदिर की सर्वोच्चता और गरिमा बनी रहे।

अयोध्या के विकास कार्यों की नवीनतम जानकारी – Matribhumi Samachar

3. वास्तुकला की त्रिवेणी: नागर, द्रविड़ और वेसर

इस संग्रहालय का मुख्य उद्देश्य दुनिया को भारतीय मंदिर निर्माण की वैज्ञानिक और कलात्मक पद्धतियों से परिचित कराना है। यहां मुख्य रूप से तीन शैलियों का प्रदर्शन होगा:

  • नागर शैली: उत्तर भारत की शिखर प्रधान शैली।

  • द्रविड़ शैली: दक्षिण भारत की गोपुरम और पिरामिडनुमा शैली।

  • वेसर शैली: हाइब्रिड शैली जो विंध्य और कृष्णा नदी के बीच पाई जाती है।

आधुनिकता और संस्कृति का मिलन

संग्रहालय परिसर में पर्यटकों के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं होंगी, जिनमें शामिल हैं:

  • डिजिटल आर्ट गैलरी: प्राचीन मंदिरों के इतिहास को 3D और VR तकनीक के माध्यम से दिखाया जाएगा।

  • सांस्कृतिक दीर्घा: भारत के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों, शक्तिपीठों और ऐतिहासिक मंदिरों के मॉडल।

  • लक्ष्मण पथ से कनेक्टिविटी: यह सरयू तट के किनारे स्थित लक्ष्मण पथ के समीप होने के कारण श्रद्धालुओं के लिए सुलभ होगा।

नोट : कुछ शुरुआती रिपोर्टों में इसे केवल एक गैलरी बताया गया था, लेकिन स्पष्ट कर दें कि यह एक पूर्ण “इंटरनेशनल म्यूजियम ऑफ इंडियन टेंपल आर्किटेक्चर” होगा। यह टाटा समूह की सीएसआर (CSR) पहल के तहत विकसित किया जा रहा है, जिसका संचालन आने वाले समय में एक ट्रस्ट या सरकारी निकाय द्वारा किया जाएगा।

निष्कर्ष:

अयोध्या का यह मंदिर संग्रहालय न केवल भारत की प्राचीन निर्माण कला को वैश्विक पहचान दिलाएगा, बल्कि यह शोधार्थियों और वास्तुकारों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। टाटा ग्रुप की यह पहल विरासत के साथ आधुनिकता के समन्वय का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।