लखनऊ | शनिवार, 25 अप्रैल 2026
उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़ी आतंकी साजिश को नाकाम करने की दिशा में बड़ी सफलता हासिल की है। यूपी एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) और स्थानीय पुलिस ने एक संयुक्त ऑपरेशन के दौरान जुल्फिकार उर्फ राका और आरिफ मलिक नाम के दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। जांच के दौरान यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि ये दोनों एक ऐसे डिजिटल नेटवर्क का हिस्सा थे, जिसे सीमा पार पाकिस्तान और दक्षिण अफ्रीका से संचालित किया जा रहा था।
पाकिस्तान और दक्षिण अफ्रीका से जुड़े नेटवर्क के तार
प्रारंभिक पूछताछ और डिजिटल फॉरेंसिक जांच में यह संकेत मिले हैं कि आरोपियों को पाकिस्तान में बैठे आकाओं से सीधे निर्देश मिल रहे थे। एजेंसियों का दावा है कि ये संदिग्ध न केवल प्रतिबंधित आतंकी संगठन ISIS की विचारधारा से प्रभावित थे, बल्कि उन्हें स्थानीय स्तर पर आगजनी, धार्मिक स्थलों को निशाना बनाने और अफरा-तफरी का माहौल पैदा करने के लिए उकसाया जा रहा था।
वायरल वीडियो ने खोली थी पोल
इस पूरे मामले की जड़ें नवंबर 2025 में हुए एक ‘इंस्टाग्राम लाइव’ वीडियो से जुड़ी हैं। उस वीडियो में कुछ युवक खुलेआम AK-47 और हैंड ग्रेनेड जैसे घातक हथियार लहराते देखे गए थे। हालांकि शुरुआत में इसे केवल दिखावा माना गया, लेकिन एटीएस की गहन जांच में सामने आया कि यह वीडियो एक बड़े रेडिकलाइजेशन मॉड्यूल का हिस्सा था।
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मुख्य कड़ी: माजिउल की गिरफ्तारी
इस मॉड्यूल का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ 18 अप्रैल, 2026 को आया, जब मुख्य संदिग्ध माजिउल को दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया। माजिउल लंबे समय से दक्षिण अफ्रीका में रह रहा था और उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी था। भारत सरकार के दबाव और विधिक कार्रवाई के चलते उसका वीजा रद्द कर दिया गया था, जिसके बाद उसे भारत लौटने पर मजबूर होना पड़ा।
एजेंसियों द्वारा की गई महत्वपूर्ण सुधार और स्पष्टीकरण
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हथियारों की सत्यता: पहले स्थानीय पुलिस ने वीडियो में दिख रहे हथियारों को नकली (खिलौना) मानकर मामला बंद कर दिया था, लेकिन एटीएस ने जांच के बाद पुष्टि की कि यह एक गंभीर साजिश का हिस्सा था।
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अंतरराष्ट्रीय समन्वय: सुरक्षा एजेंसियों ने अब दुबई में छिपे अन्य आरोपियों जैसे आकिब और आजाद के पासपोर्ट रद्द करने की प्रक्रिया तेज कर दी है।
सुरक्षा एजेंसियों का अगला कदम
अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार किए गए संदिग्धों के मोबाइल डेटा से कई व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप्स का पता चला है, जिनमें युवाओं को भड़काने वाली सामग्री साझा की जा रही थी। आने वाले दिनों में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों में भी छापेमारी की संभावना है।
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