भोपाल। शुक्रवार, 26 जून 2026
समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में मध्य प्रदेश सरकार अब बेहद निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। राज्य में इस प्रस्तावित कानून को लेकर आम जनता से मांगे गए ऑनलाइन सुझावों के जो आंकड़े सामने आए हैं, उन्होंने सभी को चौंका दिया है। विशेष रूप से मुस्लिम समुदाय की महिलाओं ने पुरानी सामाजिक रूढ़ियों को पीछे छोड़ते हुए समान नागरिक संहिता के पक्ष में खुलकर अपनी राय रखी है।
विधेयक का आधिकारिक प्रारूप (Draft) तैयार करने के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति को व्यक्तिगत श्रेणी में अब तक 9.5 लाख से अधिक ऑनलाइन सुझाव मिल चुके हैं, जिनमें से रिकॉर्ड 93 प्रतिशत लोगों ने यूसीसी का पुरजोर समर्थन किया है।
मुस्लिम महिलाओं का मिला ऐतिहासिक और साहसिक समर्थन
यूसीसी को लेकर राजनीतिक गलियारों और सामाजिक हलकों में यह संशय बना हुआ था कि अल्पसंख्यक वर्ग का इस कानून पर क्या रुख रहेगा। कई पारंपरिक मुस्लिम संगठनों ने इसका खुलकर विरोध करने का ऐलान किया था। हालांकि, जमीनी स्तर से उभरकर आई तस्वीर इसके ठीक उलट है।
राज्य में कुल 44,000 मुस्लिम नागरिकों ने ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपनी राय दर्ज कराई। इनमें से लगभग 49 प्रतिशत (21,500 लोगों) ने समान नागरिक संहिता का स्पष्ट समर्थन किया है।
इस आंकड़े में सबसे महत्वपूर्ण पहलू लैंगिक आधार (Gender-based analysis) पर दिखा अंतर है:
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71 प्रतिशत मुस्लिम महिलाओं ने कहा कि वे चाहती हैं कि राज्य में अविलंब यूसीसी लागू हो।
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इसके विपरीत, केवल 38 प्रतिशत मुस्लिम पुरुष ही इसके पक्ष में दिखे।
विशेष विश्लेषण: ये आंकड़े साफ दर्शाते हैं कि तीन तलाक (Triple Talaq) की कुप्रथा के खिलाफ बने कानून की तरह ही, मुस्लिम महिलाएं यूसीसी को भी अपने कानूनी अधिकारों, गुजारा भत्ता और पैतृक संपत्ति में समानता के लिए एक बड़े सुरक्षा कवच के रूप में देख रही हैं। यूसीसी का विरोध मुख्य रूप से उन्हीं पुरुषों या पारंपरिक विचारधारा के लोगों तक सीमित है जो पुरातन व्यवस्था को बनाए रखना चाहते हैं।
यूसीसी जनभावना के प्रमुख आंकड़े एक नज़र में
समिति को प्राप्त कुल सुझावों में महिलाओं की भागीदारी पुरुषों से कहीं अधिक रही। आंकड़ों का वर्गीकरण इस प्रकार है:
| वर्ग / श्रेणी | कुल प्राप्त सुझाव | यूसीसी के पक्ष में समर्थन (प्रतिशत) |
| कुल महिला प्रतिभागी | 4 लाख | 95% (3.8 लाख महिलाएं पक्ष में) |
| कुल पुरुष प्रतिभागी | 5.5 लाख | 92% (5.1 लाख पुरुष पक्ष में) |
| उभयलिंगी (Transgender) | 100 से अधिक | व्यापक समर्थन |
| कुल मुस्लिम महिलाएं | – | 71% (बदलाव के पक्ष में) |
| कुल मुस्लिम पुरुष | – | 38% (पुरानी व्यवस्था के समर्थक) |
रंजना प्रकाश देसाई समिति और 12 सवालों का खाका
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा अप्रैल 2026 में गठित इस छह-सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति की कमान सर्वोच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई (Justice Ranjana Prakash Desai) के हाथों में है। समिति ने राज्य के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक ताने-बाने को ध्यान में रखते हुए आम जनता के सामने विवाह, तलाक, गुजारा भत्ता, विरासत, गोद लेने और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे विषयों पर आधारित 12 प्रमुख प्रश्न रखे थे।
समिति ने हाल ही में भोपाल स्थित नरोन्हा प्रशासन अकादमी (Academy of Administration) में विभिन्न महिला संगठनों, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), पिछड़ा वर्ग (OBC) और अल्पसंख्यक कल्याण आयोगों के पदाधिकारियों के साथ मैराथन बैठकें कर उनके फीडबैक को भी इस मसौदे में शामिल किया है।
20 जुलाई से शुरू हो रहे मानसून सत्र में पेश होगा विधेयक
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि राज्य सरकार जनभावनाओं का आदर करते हुए इस ऐतिहासिक सुधार को जल्द अमलीजामा पहनाएगी। विधानसभा का आगामी मानसून सत्र 20 जुलाई, 2026 से प्रारंभ होने जा रहा है। सरकार की पूरी तैयारी है कि पांच दिवसीय इस सत्र के दौरान ही समान नागरिक संहिता विधेयक (UCC Bill) को सदन के पटल पर प्रस्तुत कर पारित करा लिया जाए।
उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद मध्य प्रदेश देश का ऐसा अगला प्रमुख राज्य बनने की राह पर है, जहां सभी नागरिकों के लिए समान दीवानी कानून लागू होगा। मसौदे में लिव-इन रिलेशनशिप का अनिवार्य पंजीकरण और बेटियों को संपत्ति में बेटों के बराबर समान अधिकार देने जैसे आधुनिक प्रावधानों को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है।
Matribhumisamachar


